बरेली: महंगाई का बोझ ढो रहे ट्रांसपोर्टर, ईएमआई निकालना भी मुश्किल

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Edited By Amrit Vichar
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ट्रांसपोर्ट के कारोबार पर भी पड़ी महंगाई की मार, खर्चे बढ़े और मुनाफा घटा

बरेली, अमृत विचार। महंगाई की मार से हर कोई परेशान है। ट्रांसपोर्ट का कारोबार करने वाले भी महंगाई बोझ ढो रहे हैं। इंश्योरेंस, ईएमआई, टोल, टायर, गाड़ियों के पार्ट, ट्रक चालकों की तनख्वाह तक बढ़ गई है, लेकिन पिछले दो बरसों से भाढ़े में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। इससे धंधे में मुनाफा नहीं हो रहा है। कुछ बड़े ट्रांसपोर्टर की बड़ी मुश्किल में ईएमआई निकल पा रही है।

जिले में व्यावसायिक वाहनों की संख्या 43,203 है। इसमें बडे़ ट्रक, कंटेनर, डीसीएम से लेकर छोटे वाहन शामिल हैं। ट्रांसपोर्ट का काम करने वालों की मानें तो पहले इस कारोबार में मुनाफा ठीक हो जाता था, लेकिन पिछले कुछ समय से महंगाई ने पूरा बजट ही बिगाड़ दिया है।

डेढ़ से दो साल पहले उत्तराखंड के बाजपुर, हल्द्वानी से 40 रुपये प्रति क्विंटल की दर रेता बजरी का भाढ़ा मिलता था, वही अब भी मिल रहा है। इंश्योरेंस पहले से काफी महंगा हो गया है। टायर महंगे हो गए हैं। टोलों की संख्या के साथ दरें भी काफी बढ़ गई हैं लेकिन किराया नहीं बढ़ा है। जिसकी वजह से मुनाफा कम हो गया है -दानिश जमाल, ट्रांसपोर्टर/महामंत्री ट्रक यूनियन।

इस धंधे में अब काम की डिमांड की अपेक्षा 30 फीसदी वाहन अधिक हैं। कंपटीशन की वजह से महंगाई के बाद भी किराया नहीं बढ़ा सकते। पार्ट डेढ़ से दोगुने महंगे हो गए हैं। साढ़े पांच रुपये प्रति किलोमीटर की दर से टोल टैक्स देना पड़ रहा है। ड्राइवरों की तनख्वाह भी बढ़ी है। 100 ट्रक कंटेनर हैं, लेकिन माैजूदा समय में 40 खड़े हैं-हरीश विग, ट्रांसपोर्टर।

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