बिगड़े हालात पर चिंता
देश का उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर लगातार जल रहा है। हिंसा में 115 से अधिक लोग मारे गए और 60 हजार से अधिक लोग विस्थापित हुए। राज्य में बड़े पैमाने पर विद्रोह की खबरें हैं जिसमें बड़ी संख्या में घर जल रहे हैं और लोगों पर हमले हो रहे हैं। राज्य के कई हिस्सों में अराजकता का आलम है। हालात की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि राज्य में जातीय हिंसा की बदलती प्रकृति केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए भी चिंता का विषय बन गई है। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने सोमवार को कहा कि राज्य में हिंसा का शुरुआती दौर बेहद संवेदनशील और राजनीति से प्रेरित था, लेकिन अब क्या हो रहा है, हम नहीं कह सकते। स्थिति अराजक है।
मुख्यमंत्री का कहना है कि मणिपुर की स्थिति को नियंत्रित करने में नागरिक समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। लोगों को अतीत को भूलकर नया जीवन शुरू करना सीखना चाहिए ताकि शांति बहाल हो सके। इससे पहले रविवार को मुख्यमंत्री ने गृहमंत्री को राज्य में शांति बहाल करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी।गौरतलब है कि मणिपुर में मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में 3 मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए जाने के बाद मणिपुर में हिंसक झड़पें शुरू हो गई थीं।
पूर्वोत्तर के इस राज्य में मैतेई समुदाय की आबादी करीब 53 प्रतिशत है, जिसमें से ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं, जबकि नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 फीसदी के आसपास है और ये ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में शनिवार को हुई सर्वदलीय बैठक में 18 दलों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को पद से हटाने की मांग की। वास्तव में केंद्र सरकार राज्य की घटनाओं के प्रति उदासीन नहीं रह सकती। कुछ अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की तरह मणिपुर में नागरिकों के बीच एक नागरिक चेतना को बढ़ावा देने की आवश्यकता है जो उन्हें जातीय पहचान से ऊपर उठकर खुद को अलग करने की अनुमति देगी।
राज्य के भीतर और बाहर नागरिक समाज के सदस्यों पर निर्भर है कि वे अंतर-सामुदायिक संबंधों के पुनर्निर्माण का मुद्दा उठाएं और उग्रवादी समूहों को प्रतिनिधित्व की भूमिका पर कब्ज़ा न करने दें। मणिपुर का संकट राजनीतिक है और इसका समाधान राजनीति में ही ढूंढना होगा। राजनीतिक सुलह प्रक्रिया को शुरू करने के लिए मजबूत कदम उठाने चाहिएं। राज्य में शांति व सद्भाव कायम करना प्रथम प्राथमिकता होना चाहिए।
