युद्ध की कीमत
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की कीमत धीरे-धीरे दुनिया को भुगतनी पड़ रही है। संघर्ष जल्द समाप्त होता नहीं दिख रहा है। इस बीच शुक्रवार की रात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की निजी सेना कहे जाने वाले वैगनर ग्रुप के विद्रोही तेवरों ने रूस समेत पूरी दुनिया को चौंका दिया। इसे पुतिन के सत्ता में दो दशक से अधिक के कार्यकाल में सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने सोमवार को इस घटनाक्रम को ‘‘रूसी प्रणाली के भीतर संघर्ष’’ करार दिया। इससे पहले पुतिन ने विद्रोह के बाद अपने पहले सार्वजनिक बयान में इसके लिए ‘‘रूस के दुश्मनों’’ को दोषी ठहराया था। यहां उल्लेखनीय है कि वैगनर के लड़ाके अपने उपकरणों के साथ रूस और यूक्रेन के बीच मॉस्को से लगभग 360 किलोमीटर दक्षिण में लिपेत्स्क प्रांत तक पहुंच गए थे। रूस के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का ऐलान करने वाले प्रीगोझिन ने अपने लड़ाकों को रूस की राजधानी मॉस्को की तरफ कूच करने का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में उन्होंने लड़ाकों से अचानक रास्ता बदलने को कहा था।
सवाल उठाया जा रहा है कि पुतिन के इशारे पर पूरी दुनिया के अशांत इलाकों में कोहराम मचाने वाले वैगनर समूह ने अचानक विद्रोही तेवर क्यों अपना लिए? कहा जा रहा है कि सवा साल से अधिक चले युद्ध से सेना ही नहीं बल्कि प्राइवेट आर्मी वैगनर समूह में भी असंतोष के सुर तेज होने लगे हैं। यह रोष कहीं न कहीं रूसी नागरिकों में भी नजर आता है जिनका जीवन यूक्रेन युद्ध के चलते अब सामान्य नहीं रह सका है। दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय सामूहिक सुरक्षा प्रणाली कमज़ोर हुई है। मानव कल्याण और मानवाधिकारों पर विनाशकारी असर हुआ है, बच्चों की एक पूरी पीढ़ी सदमे है और वैश्विक ऊर्जा व खाद्य संकट में तेज़ी आई है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के मुताबिक अब तक 24 हज़ार 862 लोग हताहत हुए हैं, लेकिन वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक होने की आशंका है। युद्ध की वजह से सबसे अधिक नुकसान पृथ्वी को हो रहा है। बताया गया है कि रूस द्वारा मिसाइलों की बौछार व ड्रोन हमलों में मई महीने में तीन गुना वृद्धि हुई। यह युद्ध पर्यावरण को एक से अधिक तरीकों से प्रभावित कर रहा हैं। संयुक्त राष्ट्र ने रूस से अंतर्राष्ट्रीय मानव कल्याण कानून के तहत अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभी पक्षों के लिए वार्ता की मेज पर लौटने की अपील निश्चित रूप से मौजूदा संकट से उपजने वाले अन्य खतरों के प्रति सतर्क करने वाली थी।
