बरेली: तीन माह से नहीं मिली प्रोत्साहन राशि, कैसे होगा गोवंशीय पशुओं का पालन
जनपद में मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना दम तोड़ रही
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बरेली, अमृत विचार। गोशालाओं से गाय गोद लेने को शुरू की गई मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना जिले में दम तोड़ रही है। गायों की देखभाल के लिए ग्रामीणों को तीन माह से योजना के तहत प्राेत्साहन राशि नहीं मिली है। अफसर पर्याप्त बजट न मिलने का रोना रो रहे हैं।
जिले में 50 गोवंश आश्रय स्थल हैं। सहभागिता योजना में गोशालाओं में मौजूद गायों को पालने के लिए किसानों को 900 रुपये महीने देने का प्रावधान है। अफसरों के मुताबिक के वर्तमान में 931 पालकों ने 1236 पशुओं को गोद ले रखा है। इनमें किसी के पास दो तो किसी के पास चार गाय हैं। प्रतिदिन एक गाय पर 30 रुपये के हिसाब से पालकों को भुगतान करना होता है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
अधिकारियों के मुताबिक योजना का मकसद गोशाला में रह रहीं दुधारू गायों को कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के परिजनों को देकर उनको सेहतमंद बनाना है। इसके लिए बाल विकास विभाग ऐसे बच्चों के घर जाकर परिवारों को गाय गोद लेने के लिए प्रेरित कर रहा है। जिले में पांच साल की उम्र तक करीब ढाई हजार अतिकुपोषित और 30 हजार के करीब कुपोषित बच्चे हैं। इनमें मात्र 1236 ने ही गाय गोद ली है। प्रोत्साहन राशि न मिलने पर अब योजना के क्रियान्वयन से जुड़े विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं।
आईजीआरएस पर शिकायतों की भरमार
हर माह पशुओं के लिए मिलने वाली धनराशि नहीं मिलने पर कई पशुपालकों ने लिखित और आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते हुए बताया है कि उन्हें कई माह से प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। वहीं, पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. ओपी वर्मा का कहना है कि अप्रैल तक का भुगतान गाय गोद लेने वाले सभी पशुपालकों के खाते में भेज दिया गया है।
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