हल्द्वानीः VIP की जांच एसटीएच में तो निजी अस्पतालों से लुट रहे गरीब, तर्क ये खुद की जांच पर नहीं है भरोसा... आखिर क्यों 

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार। कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल में दवा, इम्प्लांट और जांच के नाम पर गरीबों को निजी अस्पतालों में लुटवाया जा रहा है। जबकि वीआईपी मरीजों की हर जांच एसटीएच में आसानी से होती है। गरीबों को बाहर से जांच कराने के लिए तर्क दिया जाता है कि उन्हें एसटीएच की जांच पर भरोसा नहीं है। जांच के नाम पर हो रहे इस खेल में अस्पताल के चिकित्सक व कर्मचारियों की भूमिका नजर आ रही है।

कॉलेज के प्राचार्य खुद हैं कार्डियोलॉजिस्ट, फिर भी... 

बता दें कि एसटीएच में डॉ. अरुण जोशी एमडी कॉर्डियोलॉजिस्ट हैं और वर्तमान में राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य के पद पर तैनात हैं। काफी लंबे समय से वह एसटीएच में दिल के मरीजों की ईको जांच कर रहे हैं। हर दिन 8 से 10 लोगों का ईको टेस्ट होता है। डॉ. अरुण जोशी की ईको रिपोर्ट को आज तक कोई एक्सपर्ट कॉर्डियोलॉजिस्ट गलत साबित नहीं कर पाया है। अब तक जितने भी मरीजों के ऑपरेशन हुए हैं, उनकी अधिकांश ईको रिपोर्ट डॉ. अरुण जोशी ने ही बनाई थी। कुमाऊं के जितने भी वीवीआईपी रोगी होते हैं डॉ. अरुण जोशी के द्वारा ही उनका ईको किया जाता है। ऐसे में अस्पताल के चिकित्सकों का उनकी रिपोर्ट पर सवाल उठाना गंभीर मामला है।

मरीज ने प्रबंधन पर लगाया आरोप 

इधर, अल्मोड़ा निवासी त्रिलोचन जोशी ने बताया कि उनके पिता चक्रधर जोशी के पैर की एड़ी के ऊपर सूजन थी। 26 जून को वह पिता को दिखाने एसटीएच के सर्जरी विभाग में पहुंचे, जहां चिकित्सक ने ऑपरेशन की बात कहते हुए भर्ती कर दिया। आरोप है कि मरीज का ईको टेस्ट से पूर्व कलर डोप्लर अल्ट्रासाउंड भी निजी क्लीनिक से कराया गया। जबकि अस्पताल में दो-दो एमडी रेडियोलॉजिस्ट नियुक्त हैं। 

मामला उजागर होने पर कॉलेज में ही कर दिया गया टेस्ट

विभागाध्यक्ष के अधीन एक महिला चिकित्सक ने अस्पताल में ईको टेस्ट न होने की बात कहते हुए त्रिलोचन से पिता का ईको निजी अस्पताल से कराकर लाने को कहा। मामला सामने आया तो आनन-फानन में एसटीएच में ही मरीज का ईको टेस्ट कर दिया गया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी खुद ईको टेस्ट करते हैं तो फिर सामान्य या गरीब मरीजों को टेस्ट के लिए निजी अस्पताल क्यों भेजा जाता है।

पर्चे में लिखकर दिया निजी हॉस्पिटल का नाम

अस्पताल में सुविधा होते हुए अकसर मरीजों को बाहर से जांच कराकर लाने को कहा जाता है। त्रिलोचन को महिला चिकित्सक ने एक पर्चा दिया था, जिसमें जगदम्बा नगर स्थित निजी अस्पताल का नाम लिखा था और वहीं से ईको टेस्ट कराकर लाने को कहा था। सवाल है जब मरीज का ईको टेस्ट बाहर से कराना था तो उसे एक ही अस्पताल का नाम लिखकर क्यों दिया गया, वह भी मोबाइल नंबर के साथ।

दस दिन में दूसरा मामला आया सामने

एसटीएच में मरीज से बाहर जांच कराने का यह दूसरा मामला सामने आया है। इससे पहले 20 जून को अस्पताल के न्यूरो सर्जन के एक मरीज के तीमारदार से ऑपरेशन के दौरान दवा और इम्प्लांट बाहर से मंगाये थे। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। मामले में राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलग-अलग जांच कर रहे हैं। जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि शनिवार को एक और नया मामला सामने आ गया। 

क्या बोले जिम्मेदार

राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ अरुण जोशी ने बताया कि शिकायत मिलने पर मरीज का तुरंत ईको टेस्ट कर दिया गया था। अस्पताल में जांच होते हुए बाहर से क्यों जांच कराई जा रही थी, इस संबंध में विभागाध्यक्ष से पूछा गया है।

वहीं, सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राजीव सिंह ने बताया कि मरीज के पैर की नसों में परेशानी है। एनेस्थिसिया (बेहोशी) विभाग एमडी कॉर्डियोलॉजिस्ट की रिपोर्ट नहीं मानता है। प्राचार्य को कई बार शिकायत की जा चुकी है। एनेस्थिसिया एक्सपर्ट कॉर्डियोलॉजिस्ट का ही ओपेनियन मांगता है। जिस कारण मरीजों का ऑपरेशन करने में दिक्कत आती है।

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