परिवार की परिभाषा में बहन शामिल नहीं : हाईकोर्ट

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प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्थानांतरण याचिका को खारिज करते हुए याची को स्थानांतरण नीति से छूट पाने का हकदार नहीं माना है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय की एकलपीठ ने पारित किया है। वर्तमान याचिका अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पीएसी मुख्यालय, यूपी लखनऊ द्वारा दिनांक 13.6.2023 को पारित आदेश को चुनौती देते हुए कानपुर निवासी छत्रपाल सिंह ने दाखिल की थी, जिसमें याची को इस आधार पर स्थानांतरित कर दिया गया था कि उसने इस पोस्टिंग के वर्तमान स्थान पर 15 साल की सेवा पूरी कर ली है। याची ने इस आधार पर स्थानांतरण आदेश को चुनौती दी कि उसकी बहन 80 प्रतिशत विकलांग है और उस पर निर्भर है, इसलिए वह स्थानांतरण नीति से छूट पाने का हकदार है।

याची का तर्क दिनांक 15.12.2003 के एक सरकारी आदेश पर आधारित है जो यह प्रावधान करता है कि जिन कर्मचारियों के आश्रित परिवार के सदस्य विकलांग हैं, उन्हें सामान्य स्थानांतरण नीति से छूट दी जाएगी। परिवार के सदस्यों को माता-पिता, पति या पत्नी और अविवाहित पुत्रों के रूप में परिभाषित किया गया है। दिनांक 15.12.2003 के शासनादेश के अंतर्गत परिवार की परिभाषा में बहन शामिल नहीं है। उक्त तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने कहा कि उपरोक्त सरकारी आदेश के आधार पर याची के पक्ष में कोई अधिकार अर्जित नहीं होता है। दिनांक 13.6.2023 के आदेश में कोई क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि नहीं है। याची यह दिखाने में सक्षम नहीं है कि स्थानांतरण आदेश पारित करते समय सक्षम प्राधिकारी की कोई भी दुर्भावना थी। अतः याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया।

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