बरेली: कोरोना के साये में पैर पसार रहा मलेरिया
बरेली,अमृत विचार। कोरोना संक्रमण के साथ ही जिले में मलेरिया ने भी जोर पकड़ लिया है। इससे बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम नाकाफी दिखाई दे रहे हैं। जिले में पिछले साल के मुकाबले आधी भी स्क्रीनिंग नहीं हुई है। तमाम लोग कोरोना के डर की वजह से जांच कराने से बच रहे हैं। …
बरेली,अमृत विचार। कोरोना संक्रमण के साथ ही जिले में मलेरिया ने भी जोर पकड़ लिया है। इससे बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम नाकाफी दिखाई दे रहे हैं। जिले में पिछले साल के मुकाबले आधी भी स्क्रीनिंग नहीं हुई है। तमाम लोग कोरोना के डर की वजह से जांच कराने से बच रहे हैं। जांच नहीं होने से मलेरिया से ग्रसित मरीजों की तकलीफ बढ़ने की आशंका है।
मलेरिया के लिहाज से बरेली पिछले दो साल से काफी संवेदनशील है। वर्ष 2018 में तो जिले में तेजी से मलेरिया फैला और कई लोगों की मौत भी हो गई। अगले ही साल स्वास्थ्य विभाग ने मौतों को तो नियंत्रित कर लिया लेकिन मरीजों की संख्या को कम करने में सफल नहीं हो पाए। इस बार शुरू से ही कोरोना महामारी का कहर रहा। स्वास्थ्य विभाग कोरोना संक्रमितों के उपचार में लग गया लेकिन मलेरिया पर ध्यान नहीं दिया। इसके चलते अब मलेरिया का जिले में प्रभाव तेज हो गया है।
अगस्त में फाल्सीपेरम के मिले 525 मरीज
इस साल के शुरुआती माह से ही मलेरिया के मरीज मिलने शुरू हो गए थे। इनमें प्लाज्मोडियम वाईवेक्स के मरीजों की संख्या अधिक थी। जनवरी से जुलाई तक छह माह में फाल्सीपेरम के मात्र 90 और प्लाज्मोडियम वाईवेक्स के 2460 मरीज मिले थे। अगस्त में यह आंकड़ा काफी बढ़ गया है। एक माह में खतरनाक फाल्सीपेरम के करीब 525 और प्लाज्मोडियम वाईवेक्स के करीब 900 मरीज मिले हैं। मलेरिया का यह आंकड़ा चिंताजनक है।
आधी से भी कम हो गई स्क्रीनिंग
कोरोना के चलते स्वास्थ्य विभाग मलेरिया पर ध्यान नहीं दे पा रहा है। इस कारण पिछले साल की तुलना में स्क्रीनिंग आधी से भी कम रह गई। वर्ष 2019 में अगस्त माह में ही करीब 39 हजार लोगों की स्क्रीनिंग स्वास्थ्य विभाग ने की थी। इस बार अब तक करीब 16 हजार लोगों की ही जांच हो पाई है।
ये हैं संवेदनशील इलाके
जिले में मलेरिया को लेकर पिछले साल में भमोरा, मझगवां, मीरगंज, फरीदपुर, रामनगर, क्यारा, फतेहगंज पश्चिमी के करीब 800 गांव मलेरिया को लेकर संवेदनशील थे। इस बार अब तक भमोरा, मझगवां और मीरगंज ब्लॉक के गांवों से ही मरीज सामने आए हैं। वहां करीब 114 गांवों को स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील माना है। अब तक कुल 397 गांव में डीडीटी का छिड़काव हो चुका है।
“जिले में मलेरिया के मरीजों को पता लगाने के लिए लगातार स्क्रीनिंग कराई जा रही है। जहां भी केस पाए जा रहे हैं वहां तत्काल दवा दी जा रही है। अब तक मलेरिया के मरीजों की संख्या पिछले साल की तुलना में कम है।” -डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ
क्या है प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम
300 बेड अस्पतला के सीएमएस डा. बागीश वैश्य ने बताया कि प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम काफी खतरनाक मलेरिया होता है। इसमें सिर में तेज दर्द होता है। इसमें मरीज की मौत भी हो सकती है। प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम के केस अब अस्पताल में आना शुरू हो गए हैं।
क्या है प्लाज्मोडियम वाईवेक्स
इसमें मरीज को साधारण तरह का बुखार आता है। इसमें बुखार दिन के समय आता है। इसका प्रभाव 48घंटे के बाद सामने आता है। इसमें रोगी को कमर, सिर, हाथ, पैरों में दर्द, कंपकपी के साथ तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
