एससीओ के मुद्दे

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

विवादों, तनावों और महामारी से घिरे विश्व में फूड, फ्यूल और फर्टिलाइजर की किल्लत सभी देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है। आतंकवाद क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति के लिए प्रमुख खतरा बना हुआ है।

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन की बैठक की मेजबानी करते हुए सदस्य देशों को संदेश दिया कि हम बेहतर सहयोग तथा समन्वय के माध्यम से सभी चुनौतियों का समाधान करें और लोगों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास करें।

यह विचार किया जाना चाहिए कि क्या हम एक संगठन के रूप में लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने में समर्थ हैं? प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत ने एससीओ के भीतर सहयोग के पांच स्तंभ स्थापित किए हैं-स्टार्टअप और इनोवेशन, पारंपरिक चिकित्सा, युवा सशक्तिकरण, डिजिटल समावेशन और साझा बौद्ध विरासत।

पिछले दो दशकों में एससीओ पूरे यूरेशिया क्षेत्र में शांति, समृद्धि और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य वैश्विक संस्थानों में भी सुधार के लिए एससीओ एक महत्वपूर्ण आवाज़ बन सकता है। भारत का प्रयास रहा है कि एससीओ में सहयोग केवल सरकारों तक सीमित न रहे।

गौरतलब है कि एससीओ विश्व के 40 प्रतिशत लोगों और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग एक तिहाई का प्रतिनिधित्व करता है। शंघाई सहयोग संगठन जून 2001 में ‘शंघाई फाइव’के विस्तार के बाद अस्तित्व में आया था। ‘शंघाई फाइव’का गठन रूस, चीन, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान और ताजिकिस्तान ने साथ मिलकर वर्ष 1996 में किया था।

इस संगठन के उद्देश्यों में क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की संख्या में कमी करना, और आतंकवाद की चुनौती पर काम करना आदि शामिल थे। शंघाई सहयोग संगठन में ईरान के औपचारिक रूप से सदस्य बनने के साथ समूह के सदस्यों की संख्या नौ हो गई है। ये हैं चीन, भारत, रूस, कज़ाख़िस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और ईरान।  

ईरान की एससीओ सदस्यता के बाद चाबहार पोर्ट के बेहतर उपयोग के लिए काम कर सकते हैं। मध्य एशिया के लैंडलाक्ड देशों के लिए अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा, इंडियन ओशन तक पहुंचने का एक सुरक्षित और सुगम रास्ता बन सकता है। हमें इसका महत्व समझना चाहिए।

सवाल है कि क्या एससीओ एक ऐसा संगठन बन रहा है जो भविष्य के लिए पूरी तरह से तैयार हो? आज की शिखर बैठक से यही संकेत मिलता है कि यह संगठन यूरेशियाई सहयोग को बढ़ाने तथा बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। ऐसे में सदस्य देशों की साझी जिम्मेदारी है कि एक-दूसरे की जरूरतों और संवेदनशीलताओं को समझें।