बरेली: बेटियां ही नहीं होंगी तो बेटों के लिए दुल्हन कहां से लाओगे, आबादी बढ़ने के बाद भी घट रही संख्या

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अंकित चौहान, बरेली। देश की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। इस मामले में हम चीन से भी आगे निकल चुके हैं, मगर बेटों की तुलना में बेटियों की संख्या में कमी आ रही है। जिले में 1000 बेटों के सापेक्ष 965 बेटियां जन्म ले रही हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। बेटों की चाह में बेटियों को पेट में ही मार दिया जाता है। जब बेटियां ही नहीं होंगी तो बेटों के लिए दुल्हन कहां से आएंगी।

शासन बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ समेत कई योजनाएं चला रहा है, ताकि बेटियां किसी के लिए बोझ न बनें, मगर इसके बाद भी बेटियों की संख्या बढ़ने की बजाय घट रही है। सरकारी प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। मंगलवार को विश्व जनसंख्या दिवस मनाने मनाया जाएगा। बढ़ती जनसंख्या को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। बेटियों को बचाने का भी नारा दिया जाएगा, मगर भविष्य में इस पर कितना अमल होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

क्या कहती है एनएफएचएस की रिपोर्ट
विभागीय अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2015-16 में किए गए एनएफएचएस-4 यानी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार जिले में 1000 बेटों पर 979 बेटियों के जन्म हो रहा था। वर्ष 2019-21 को एनएफएचएस-5 सर्वे के अनुसार जिले में 1000 बेटों के जन्म पर बेटियों की संख्या घटकर 965 रह गई है। एनएफएसएस-5 सर्वे में बेटों की तुलना में बेटियों के जन्मदर में ढाई फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

आज यहां होंगे कार्यक्रम
विश्व जनसंख्या दिवस पर मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्यारा, मीरगंज, फरीदपुर समेत अन्य सीएचसी पर कार्यक्रम होंगे, जिसमें लोगों को परिवार नियोजन के उपाय बताए जाएंगे। जिला महिला और पुरुष अस्पताल में भी कार्यक्रम होंगे।

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