बरेली: दो वर्ष या इससे अधिक की सजा में दोष सिद्ध हैं तो नहीं चला सकेंगे शैक्षणिक संस्थान
शैक्षणिक संस्थान का पंजीकरण, नवीनीकरण कराने को प्रबंध समिति के पदाधिकारियों के संबंध में देना होगा शपथपत्र
बरेली, अमृत विचार। शैक्षणिक संस्थानों की प्रबंध समितियों से जुड़ा कोई व्यक्ति, जिसके विरुद्ध सक्षम न्यायालय ने दो वर्ष या इससे अधिक दंड की सजा सुनाई है तो वह व्यक्ति शैक्षणिक संस्थान नहीं चला सकेगा और न ही उसे प्रबंध समिति में पदाधिकारी बनाया जाएगा। अपराधों में संलिप्त रहकर शैक्षणिक संस्थान चलाने वालों के खिलाफ शासन ने सख्ती की तैयारी कर ली है।
शैक्षणिक संस्थान का पंजीकरण और नवीनीकरण कराने के दौरान प्रबंध समिति के पदाधिकारियों के संबंध में इस आशय का एक शपथपत्र देना होगा कि किसी भी सदस्य को किसी सक्षम न्यायालय ने दो वर्ष या उससे अधिक दंड से दंडित नहीं किया है। संस्थानों की प्रबंध समितियों के पंजीकरण और नवीनीकरण प्रत्येक मंडल मुख्यालय स्थित सहायक रजिस्ट्रार चिट्स फर्म्स एवं सोसाइटीज कार्यालय में होते हैं।
सहायक रजिस्ट्रार नीरज उर्फ यादवेंद्र पाठक ने बताया कि 27 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने आदेश पारित कर प्रमुख सचिव को आदेशित किया है कि वह अपने स्तर से शासनादेश जारी करके प्रत्येक मंडलीय कार्यालय के सहायक रजिस्ट्रार एवं डिप्टी रजिस्ट्रार को इसमें कार्रवाई करने को आदेशित करें।
साथ ही सहायक रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार प्रबंध समितियों के पदाधिकारियों से इस आशय का शपथपत्र सोसायटी के पंजीकरण, नवीनीकरण के समय दाखिल कराएं। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने 5 जुलाई को आदेश जारी किया है कि वे लोग शैक्षणिक संस्थानों के पदाधिकारी नहीं बन पाएंगे, जिनके खिलाफ सक्षम न्यायालय ने दो वर्ष या इससे अधिक दंड की सजा सुनाई है। अब सभी मामलों में पाक साफ होने पर ही शैक्षणिक संस्थान की प्रबंध समिति में व्यक्ति पदाधिकारी रह सकेगा।
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