Kanpur : कैंट की सड़कों से होगी अंग्रेजों के नामों की विदाई, सालों से हो रही थी बदलने की मांग, पढ़ें- पूरी खबर
कानपुर की सड़कों से होगी अंग्रेजों की विदाई।
कानपुर की सड़कों से होगी अंग्रेजों की विदाई। छावनी बोर्ड के 1979 के प्रस्ताव संख्या 152 पर मुहर लगने के बाद सार्वजनिक सूचना की जारी।
कानपुर, [अभिषेक वर्मा]। भारत में ब्रिटिश हुकूमत ने करीब दो सौ साल राज किया। इस दौरान उनके द्वारा बनाई गए भवन, सड़क और मिलों को भी अंग्रेजों के नाम से ही जाना गया। आजादी के 75 साल के बाद भी शहर की कई सड़कें गुलामी की जंजीरों में थी, लेकिन अब इन सड़कों को भी अंग्रेजों से आजादी मिलने जा रही है।
कैंट बोर्ड क्षेत्र में आने वाली 18 सड़कों के नाम को परिवर्तित कर दिया गया है। इसको लेकर कैंट बोर्ड की ओर से सार्वजनिक सूचना भी जारी कर दी गई है। अधिकारियों की माने तो अब जल्द ही इन सड़कों पर नए बोर्ड लगाने की तैयारी है, ताकि, लोग पुराने नामों को अपने दिमाक से उतार सकें।
फूलबाग एलआईसी भवन से आगे बढ़े तो नरोना रोड से होते हुए चौराहा पहुंचेंगे। यहां टैंपो और टैक्सी वालों को नरौना चौराहा चिल्लाते भी सुना जा सकता है। लेकिन, अब यह रोड नेहरू मार्ग के नाम से जाना जाएगा। कैंट बोर्ड इसका बोर्ड लगाने की तैयारी में है। इसी तरह परेड से सिविल लाइंस की ओर बढ़े तो यह सड़क म्योर रोड कहलाती है। अब यहां जल्द ही आपको पीर साहिब मार्ग का बोर्ड लगा मिलेगा।
इसी तरह एल्गिन रोड, लैटिन रोड, डरविन रोड समेत कैंट बोर्ड की 18 सड़कों का नाम बदल दिया गया है। यहां पर सड़कों के मार्ग सांकेतक भी लगाए जा रहे हैं। ताकि, शहर के लोगों को पुराने नाम भूलकर नए नाम लेने की आदत पड़ सके।
यहां जाने सड़कों के नाम
पहले -अब
नैपियर रोड -अशोक पथ
पील रोड -अंबेडकर पथ
कैम्ब्रिज रोड -अहिल्या बाई मार्ग
न्यू सिमेटरी रोड -अश्विनी मार्ग
हार्डिंग रोड -तिलक मार्ग
टर्नर रोड -सुभाष चंद्र बोस मार्ग
रैकब रोड -शांती पथ
नरोना रोड -नेहरू मार्ग
मायो रोड -कबीर पथ
एल्गिन रोड -रानी लक्ष्मी बाई मार्ग
लैटिन रोड -सरदार पटेल मार्ग
अल्थर्ट रोड -शिवाजी मार्ग
म्योर रोड -पीर साहिब मार्ग
कालविन रोड -विवेकानंद मार्ग
इन सड़कों के भी नाम बदले, पर कोई नहीं बोलता
बिरहाना रोड : इस सड़क का नाम बदलकर कस्तूरबा गांधी मार्ग रखा गया, लेकिन कोई नहीं जानता।
मेस्टन रोड : यहा अब हसरत मोहानी मार्ग हो गया है, लेकिन बोलता कोई भी नहीं है।
माल रोड : शहर का प्रमुख चौराहा अब महात्मा गांधी मार्ग हो गया है। यहां एमजी रोड लिखा रहता है दुकानों पर बोलचाल में नहीं है।
हालसी रोड : सरदार वल्लभभाई पटेल मार्ग, बोलचाल में आज भी लोग हालसी रोड ही कहते हैं।
लाटूश रोड : इस सड़क का नाम संयुक्त प्रांत के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर जेम्स लाटूश के नाम पर रखा गया। अंग्रेजों के समय से इस सड़क का नाम आज तक वही है, जो बदला नही है।
कलक्टरगंज : नगर निगम की लिखापढ़ी में इसका नाम नाम अयोध्या नगरी हो चुका है, लेकिन इसे कम ही लोग जानते हैं।
परेड चौराहा : यहां नाम बदलकर बलिदानी भगत सिंह के नाम पर रखा गया, लेकिन कोई नहीं बोलता।
अंग्रेजों नाम पर मौहल्ले
हूलागंज, एलेनगंज, कर्नलगंज, फेथफुल गंज, कूपरगंज, हैरिसगंज, बेकनगंज, मूलगंज, सूटरगंज, मैकराबर्टगंज, कलक्टरगंज
यह भी जानें
गिलिस बाजार : 1857 से पहले बहुत सी फौजी कंपनियां कानपुर में ठहरती थीं। इनमें से बंगाल इंफेंट्री सबसे महत्वपूर्ण थी। इन्हें गिलिसेज भी कहा जाता था। इसी गिलिसेज के नाम पर गिलिस बाजार अस्तित्व में आया।
कंपनी बाग : नवाबगंज में आज भी कंपनी बाग है। 1847 में अंग्रेजों की सेनाएं यहां आकर रुकी थीं। इसे कंपनी बाग कहा जाने लगा।
परेड : कारसेट चौराहे से नई सड़क होकर सेंट्रल स्टेशन जाने पर परेड चौराहा मिलता है। यहां मैदान में अंग्रेजों की सेना की परेड होती थी, जिससे इसका नाम परेड पड़ गया।
आज भी कई सड़कों के नाम पुराने नामों से ही प्रचलित हैं। शहर के लोग नए नामों को जानें, इसके लिए नए बोर्ड और सांकेतक लगाए जाएंगे। इसकी तैयारी कर ली है।- अनुज गोयल, मुख्य अधिशाषी अधिकारी, छावनी परिषद
