बरेली: चार महीने से नहीं मिला पैसा, कर्जदार बने कोरोना से अनाथ हुए बच्चे

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जिले में 312 अनाथ बच्चों के खातों में राज्य सरकार की ओर से हर महीने भेजी जाती है चार हजार की धनराशि

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प्रीति कोहली, बरेली। कोरोना की विभीषिका के दौरान अनाथ हुए बच्चों के साथ सरकारी सिस्टम की हमदर्दी का रंग फीका पड़ने लगा है। सरकार की ओर से हर महीने दी जाने वाली चार हजार रुपये की सहायता राशि मार्च से नहीं दी गई है। सरकारी पैसे से जैसे-तैसे पढ़ाई करने वाले कई बच्चों को कर्ज लेकर फीस भरनी पड़ी है। कई और खर्च भी रुक गए हैं।

जिले भर में 312 बच्चे हैं जिन्होंने कोरोना के दौर में परिवार चलाने वाले अपने पिता या माता-पिता दोनों को खोकर बेसहारा हो गए थे। राज्य सरकार की ओर से इन बच्चों के लिए मुख्यमंत्री कोविड बाल सेवा योजना की घोषणा की थी जिसके तहत उन्हें 23 साल की उम्र तक हर महीने चार हजार रुपये की सहायता राशि दी जानी है ताकि उनकी पढ़ाई चलने के साथ जरूरी खर्च भी पूरे होते रहें। अब तक इन बच्चों की पढ़ाई और निजी खर्च इसी सहायता राशि से चल रहा था लेकिन मार्च के बाद सहायता का यह क्रम एकाएक थम गया है।

बच्चों और उनकी देखभाल कर रहे लोगों का कहना है कि वे लोग कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा चुके हैं लेकिन वहां से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा है। सिर्फ यही कह दिया जाता है कि ऊपर से जब बजट रिलीज होगा तो पैसा उन्हें भेज दिया जाएगा। सहायता राशि न आने से उनके जरूरी खर्च रुके हुए हैं। कई बच्चे ऐसे हैं जिन्हें इस बीच स्कूल की फीस भरने के लिए कर्ज लेना पड़ा है।

केस- 1
आठवीं में पढ़ने वाले भुता के राजीव के पिता इतवारी लाल किसान थे जिनकी कोरोना से मौत हो गई थी। राजीव ने बताया कि पिता की मौत के बाद सबकुछ अस्तव्यस्त हो गया। परिवार का जैसे-तैसे जीवनयापन चल रहा है। उनके पिता उनकी पढ़ाई-लिखाई की काफी चिंता करते थे, उनके बाद पूरे परिवार की स्थिति खराब हो गई। सरकार से मिल रहे चार हजार रुपये से काफी सहारा था लेकिन चार महीने से पैसा नहीं मिला है। उनकी मां ने इस बार उधार लेकर उनकी स्कूल फीस भरी है।

केस- 2
बिथरी चैनपुर में रहने वाले गोपेश 11वीं के छात्र हैं। उनके पिता इंद्रपाल इलेक्ट्रीशियन थे जिनकी कोरोना से 2021 में मृत्यु हो गई थी। गोपेश कहते हैं कि उनका खर्च सरकार से मिलने वाले चार हजार रुपये से ही चल रहा था। इधर, चार महीने से पैसा न मिलने से काफी दिक्कत हो रही है। रिश्तेदारों से उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है। उनसे कहा है कि सरकारी पैसा मिलते ही उधार लौटा दूंगा। याेजना अच्छी है मगर समय से पैसा न आने से बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है।

मई 2021 में केंद्र सरकार की ओर से किए गए थे ये एलान
कोरोना के कारण अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को 18 साल की उम्र तक मासिक भत्ता मिलेगा। 23 साल का होने पर पीएम केयर्स फंड से 10 लाख रुपए की राशि एकमुश्त दी जाएगी।

केंद्र सरकार की तरफ से बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। इन बच्चों को हायर एजुकेशन के लिए लोन मिलेगा जिसका ब्याज पीएम केयर्स फंड से दिया जाएगा।

इन बच्चों को आयुष्मान भारत योजना के तहत 18 साल तक पांच लाख रुपये तक का हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा। इस इंश्योरेंस की प्रीमियम पीएम केयर्स फंड से भरी जाएगी।

दस साल से कम के बच्चों का नजदीकी सेंट्रल स्कूल या प्राइवेट स्कूल में एडमिशन कराया जाएगा। जो बच्चे 11 से 18 साल के हैं उन्हें सैनिक स्कूल और नवोदय विद्यालय जैसे केंद्र सरकार के आवासीय स्कूल में भर्ती कराया जाएगा। अगर बच्चा अपने अभिभावक या परिवार के सदस्य के साथ रहता है तो उसे भी नजदीकी केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में एडमिशन मिलेगा।

अगर बच्चे का नामांकन निजी स्कूल में किया जाता है तो शिक्षा का अधिकार कानून के तहत उसकी फीस पीएम केयर्स फंड से दी जाएगी और उसकी स्कूल यूनिफॉर्म, किताब एवं कॉपियों के खर्च का भी भुगतान किया जाएगा।

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