महिलाओं के प्राइवेट पार्ट की समस्या और स्ट्रेस यूरिनरी इनकांटीनेंस का लेजर तकनीक से इलाज संभव, जानें क्या कहते हैं डॉक्टर
लखनऊ, लखनऊ। उम्र बढ़ने के साथ ही महिलाओं में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या सामने आने लगती है। बढ़ती उम्र में के साथ कई महिलाओं को प्राइवेट पार्ट (private part) में ढीलापन (looseness) होने की समस्या सामने आती है। इतना ही नहीं कुछ महिलाओं में यूरिन रोकने की क्षमता खत्म हो जाती है और यूरिन (पेशाब) को रोकन के लिए सर्जरी तक करानी पड़ती है। बहुत सी महिलायें सर्जरी नहीं कराना चाहती हैं। ऐसे में उन महिलाओं के लिए लेजर तकनीक फायदेमंद साबित हो रही है। इस पूरी प्रक्रिया को कॉस्मेटिक गाइनेकोलॉजी कहा जाता है। इस बात की जानकारी प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर विवेक गुप्ता ने दी। उन्होंने बताया कि स्ट्रेस यूरिनरी इनकांटीनेंस (Stress Incontinence) का इलाज और वेजाइनल टाइटनिंग जैसे ट्रीटमेंट गोल्ड स्टैंडर्ड यानी सर्वोत्तम माने जाते हैं।
क्या होता है स्ट्रेस यूरिनरी इनकांटीनेंस
डॉ. विवेक गुप्ता बताते हैं कि जिन महिलाओं को खांसते, छींकते या फिर हंसते समय मूत्रमार्ग से कुछ मात्रा में मूत्र का रिसाव हो जाये। ऐसी समस्या को स्ट्रेस इंकंटीनेन्स कहा जाता है और यह तब होता है जब मूत्रमार्ग की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। यह दिक्कत उन महिलाओं को होती है, जिन्होंने बच्चे जन्म दिया है या उनकी उम्र अधिक हो गई हो। इनका इलाज लेजर तकनीक से आसानी से किया जा सकता है। इसके अलावा जिन महिलाओं को प्राइवेट पार्ट में ढीलापन आने की दिक्कत है वह भी लेजर तकनीक से इलाज करा सकती है।
डॉ. विवेक गुप्ता ने यह जानकारी राजधानी स्थित इंण्डियन मेडिकल एसोसिएशन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दी है। कार्यक्रम का आयोजन किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थित प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार ने कराया था।
यह भी पढ़ें : धन की कमी से जूझ रहे अयोध्या मस्जिद निर्माण ट्रस्ट ने बदली रणनीति, अब ऐसे कराएगा काम
