जीएआई का उपयोग

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

भारत दुनिया के शीर्ष तीन सबसे बड़े स्टार्टअप केंद्रों में से एक है। कृत्रिम बुद्धि (एआई) की कल्पना भारत में नवाचारों को बढ़ावा देने और देश के सामाजिक मुद्दों को हल करने में सहायता करने के लिए की गई है। देश डिजिटल समावेशन और कौशल को गति देने के लिए बड़े स्तर पर एआई के इस्तेमाल की ओर बढ़ रहा है। जीवन का हर पहलू बदलता जा रहा है।

एआई पर एक राष्ट्रीय कार्यक्रम देश के निर्माण में योगदान देने के लिए उत्प्रेरित करेगा। इस महत्वाकांक्षी पहल को साकार करने के लिए केंद्र सरकार ने नौ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की है। एआई को स्वास्थ्य देखभाल, कृषि, शिक्षा, स्मार्ट सिटी और बुनियादी ढांचे, स्मार्ट जैसे नौ फोकस क्षेत्रों को विकसित करने के भारत सरकार के प्रयासों का आधार माना जा रहा है। सरकार ने एआई हेतु राष्ट्रीय रणनीति प्रकाशित की है।

विभिन्न मंत्रालय और एजेंसियां एआई के उपयोग पर काम कर रही हैं। सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सीडीएसी) इमेज प्रोसेसिंग, ऑडियो सहायता, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि , परिवहन आदि पर ध्यान देने के साथ एआई के क्षेत्र में काम कर रहा है। वैश्विक स्तर पर भी एआई को लेकर गला काट प्रतिस्पर्धा है।

नई-नई इंटेलीजेंस कंपनियां लांच की जा चुकी हैं, कुछ आने को तैयार बैठी हैं। एआई उत्पादन के एक नए कारक के रूप में उभर रहा है, जो उत्पादन के पारंपरिक कारकों को बढ़ा रहा है। कुल कारक उत्पादकता में शामिल हैं श्रम, पूंजी और नवाचार और तकनीकी परिवर्तन।  

एआई से वर्ष 2035 तक भारत की अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त 957 बिलियन अमेरिकी डॉलर के योगदान की उम्मीद है। उधर जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जीएआई) कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तेज़ी से विकसित होने वाली शाखा है,  जो डेटा के अनुरूप प्रतिरूप और नियमों के आधार पर नई सामग्री (जैसे चित्र, ऑडियो, पाठ आदि) उत्पन्न करने पर ध्यान केंद्रित करती है। इसका उपयोग अभी अपने शुरुआती चरण में है लेकिन इसका प्रभाव बढ़ने की संभावना है क्योंकि प्रौद्योगिकी का निरंतर विकास और सुधार जारी है।

यह सुनिश्चित करने के लिए नियमों और मानकों को लागू किया जाना चाहिए कि जीएआई का उपयोग जवाबदेह तथा नैतिक माध्यमों द्वारा किया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि जीएआई समाज के लाभ के लिए है। जीएआई का उपयोग उद्योग, सरकार, शिक्षाविदों और नागरिक समाज सहित हितधारकों के बीच सहयोग से ज़िम्मेदार और नैतिक तरीकों से किया जाए। इसमें डेटा गोपनीयता, पक्षपात एवं उत्तरदायित्त्व के लिए दिशा-निर्देश शामिल किया जाना आवश्यक है।

ये भी पढ़ें- गौरवशाली क्षण