उज्ज्वल संभावनाएं

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Edited By Amrit Vichar
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वैश्विक उथल-पुथल के बीच दुनिया की अर्थव्यवस्था में सुस्ती होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था घरेलू खपत की वजह से सुरक्षित है। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने बुधवार को कहा कि भारत वैश्विक सुस्ती के दौर में कई ऐसे कदम उठा रहा है जो उसे आगे रखने में मदद कर रहे हैं।

भारत महामारी के दौर की चुनौतियों से मजबूत बनकर उभरा है लेकिन उसे यह रफ्तार बनाए रखने की जरूरत है। वास्तव में देश की अर्थव्यवस्था की उज्ज्वल संभावनाओं के पक्ष में एक खास बात यह है कि इसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बड़ा हिस्सा घरेलू स्तर का है।

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भी भारत की अर्थव्यवस्था के उभार को लेकर बेहतर राय जताई है। बैंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.4 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में 6.7 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। जानकारों के मुताबिक भारत की घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां तेजी से विकास को रफ्तार दे रही हैं। हालांकि कमजोर निर्यात परेशानी का कारण बना हुआ है।

ऐसे में अगले वर्ष वैश्विक विकास और मांग को लेकर स्थिति खराब दिखाई दे रही है, जब तक निजी निवेश मजबूती से बहाल नहीं होता और लाखों युवाओं के लिए रोजगार सृजन में वृद्धि नहीं करता, मांग में वृद्धि उस अच्छे चक्र को बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होगी जिस पर सरकार दांव लगा रही है। ध्यान रहे भारत में दुनिया की सबसे युवा आबादी है। साल 2027 तक भारत दुनिया का सबसे बड़ा वर्कफोर्स बन जाएगा।

इसके साथ ही भारत उपभोक्ता के लिहाज से भी एक बड़ा मार्केट है। जो कंपनियों के लिए फायदेमंद है। भारत में संभावित नौकरियां प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्र में हैं। भारत के सामने फिलहाल यह मौका है कि वह ‘चीन प्लस वन’ रणनीति का फायदा उठाए। 

चीन प्लस वन रणनीति का मतलब है कि दुनिया के विकसित देशों की कंपनियां अब अपने विनिर्माण केंद्र के तौर पर चीन के साथ किसी अन्य देश को भी जोड़ना चाहती हैं। इसके लिए भारत भी एक संभावित दावेदार के तौर पर उभरकर सामने आया है। यदि भारत दुनिया की चीन-प्लस-वन आपूर्ति श्रृंखला खोज को भुनाना चाहता है, तो उसे अपनी व्यापार नीति को फिर से तैयार करना होगा।

ध्यान रखना होगा कि चीन प्लस वन रणनीति से मिलने वाला अवसर उसके लिए कुछ वर्षों के लिए ही खुला रहेगा। यह सही है कि देश की अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में है लेकिन अभी भी चतुराई से संचालन और सोच-समझकर सुधार करने की जरूरत है।

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