बरेली: जाने कैसी सफाई है ये जो नगर निगम में सब कुछ हुआ जा रहा है साफ

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। भाजपा के मेयर उमेश गौतम की अगुवाई में बने बजट से भाजपा के ही सबसे पुराने पार्षदों में से एक सतीश कातिब सहमत नहीं हैं। उनका दावा है कि जिस तरह हवाई बजट तैयार किया गया है, उससे नगर निगम शहर में एक पुलिया तक नहीं बनवा पाएगा। जिस तरह नगर निगम का हित देखे बगैर चुनिंदा लोगों का टैक्स कम कराया जा रहा है, उससे हालत और पतली होगी। 

उन्होंने अफसरों पर नगर निगम के सफाई कर्मियों को अपने घरों पर काम कराने का आरोप लगाते हुए शहर में बढ़ रही गंदगी पर भी सवाल उठाया। बता दें कि हाल ही में नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स का फावड़ा लेकर नाली साफ करने और मेयर उमेश गौतम नगर निगम में सामान ढोना काफी चर्चा में रहा था।

सतीश कातिब का कहना है कि नगर निगम के विकास कार्यों का ब्योरा प्रपत्र बी-1 पर दर्ज होता है लेकिन वही अधूरा था, लिहाजा बजट बैठक भी औचित्यहीन रही। उन्होंने बताया कि नगर निगम में सफाई मद में ज्यादा बजट का प्रावधान किया गया है लेकिन शहर में सफाई नहीं हो रही है। सफाई कर्मियों को अफसरों ने घरों मे लगा रखा है। उन्हें ड्राइवर और सफाई नायक बनाकर उनके मूल काम से हटा दिया गया है। शहर में सफाई न होने का यह प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि बजट में जितनी राजस्व वसूली दिखाई जा रही है उतनी हो नहीं पाएगी। टैक्स में भ्रष्टाचार रोकने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। इसी कारण नगर निगम इस साल भी काम कराने की स्थिति में नहीं होगा।

काम सिर्फ 13 करोड़ के, फिर निर्माण विभाग पर 65 करोड़ का कर्जदार कैसे
पिछले साल निर्माण विभाग ने सिर्फ 13 करोड़ के काम कराए लेकिन उस पर देनदारी 65 करोड़ की हो गई। बजट न होते हुए भी काम कराए गए लेकिन अब ठेकेदारों को भुगतान करने के लिए नगर निगम के पास पैसा नही है। पार्षदों का सवाल है कि नगर निगम पर इतना कर्ज बढ़ाने का जिम्मेदार कौन है। दूसरे विभागों का भी लगभग 30 करोड़ का कर्ज है। इस बार निर्माण विभाग का लगभग 80 करोड़ का बजट है। सवाल उठ रहा है कि लक्ष्य के मुताबिक आय न हुई तो काम कैसे होगें। नगर निगम के चालू वित्तीय वर्ष के बजट में भी आय से ज्यादा जोर खर्च पर है। दूसरे कामों की तुलना में स्वच्छता पर जोर दिया जा रहा है।

नगर निगम में कोई बड़ा ठेकेदार आने को तैयार नहीं
सपा के पार्षद राजेश अग्रवाल भी मानते हैं कि नगर निगम में इस वित्तीय वर्ष में भी जरूरत के मुताबिक निर्माण कार्य होने मुश्किल हैं। उनका कहना है कि सफाई का बजट बढ़ाकर लगभग 40 करोड़ कर दिया गया है, निर्माण के लिए 80 करोड़ का ही बजट तय किया गया है। राजेश का कहना है कि बजट देखने में अच्छा है लेकिन वास्तविकता में नहीं। नगर निगम की वित्तीय हालत पतली होने के कारण कोई बड़ा ठेकेदार काम करने नहीं आ रहा। डोर टू डोर का ठेका देने के लिए मेयर ने बड़े ठेकेदार को ठेका देने की बात कही थी लेकिन दो बार रीटेंडर के बाद भी कोई ठेका लेने नहीं आया है। सफाई पर इतना ज्यादा खर्च के बावजूद शहर नर्क बना हुआ है।

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