उत्तराखंड: देवों की झील देवरिया...जहां आकर मिट जाएगी आपकी थकान
उत्तराखंड, अमृत विचार। देवभूमि के रुद्रप्रयाग में पहाड़ों के बीच में स्थित एक मनोरम झील है। हर वर्ष लाखों पर्यटक इस झील के लिए ट्रैक करते हैं। यह झील अपने धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इस झील के पास में पंचकेदार में से एक तुंगनाथ मंदिर भी स्थित है जहां ट्रेक करके पहुंचा जा सकता है। इस झील का मुख्य आकर्षण इसके पानी में बनते आसपास के पहाड़ों की चोटियों के प्रतिबिम्ब हैं जिसे देखने दूर-दूर से सैलानी यहां आते हैं। इसके साथ ही इसका संबंध देवताओं व महाभारत काल से भी है।

देवरिया झील उखीमठ के पास सारी गांव से 2 से 3 किलोमीटर ऊपर स्थित है। समुंद्र तल से इसकी ऊंचाई 2,438 मीटर (8,000 फीट) है। यहां पहुंचने के लिए आपको पहले सारी गांव पहुंचना होगा जो तुंगनाथ जाते समय चोपता के रास्ते में पड़ता हैं। इस गाँव से 2 से 3 किलोमीटर ऊपर ट्रेक करके इस सुंदर झील तक पहुंचा जा सकता है।कुछ लोग चोपता से तुंगनाथ मंदिर का ट्रेक करते हैं तो कुछ देवरिया ताल झील से भी वहां पहुंचते हैं। चोपता से तुंगनाथ का ट्रेक छोटा है तो वही देवरिया ताल से इसे करने में 3 से 4 दिन का समय लग जाता है। देवरिया ताल से तुंगनाथ के ट्रेक का इस्तेमाल मुख्यतया ट्रेवल व ट्रैकिंग कंपनियों के द्वारा किया जाता हैं।
इस झील से जुड़ीं दो कथाएं जुड़ी हुई हैं, सनातन धर्म के अनुसार स्वर्ग लोक में देवी-देवता निवास करते हैं तथा वे समय-समय पर पृथ्वी की यात्रा पर आया करते हैं। मान्यता है कि इंद्र देव व बाकि देवता इसी देवरिया ताल झील में स्नान किया करते थे। इसी कारण इसका नाम देवों की झील या देवरिया ताल पड़ा। इसी के साथ इसका दूसरा नाम इंद्र सरोवर भी है अर्थात देव इंद्र के स्नान करने का सरोवर।
मान्यता यह भी है कि पांडवों को द्यूत खेल के बाद 13 वर्ष का वनवास काल मिला था और इस दौरान यक्ष ने पांचों पांडवों से प्रश्न इसी झील के पास पूछे थे। एक अलग मान्यता के अनुसार यक्ष ने पांडवों से प्रश्न पाकिस्तान के कटासराज मंदिर के सरोवर में पूछे थे। देवरिया ताल के निर्माण के लिए भी पांडवों का योगदान बताया गया है। एक और मान्यता के अनुसार, जब पांडवों को प्यास लगी थी तब भीम ने अपनी शक्ति से देवरिया ताल झील का निर्माण किया था जिससे सभी पांडवों की प्यास बुझी थी। इसी के साथ यक्ष भी इसी झील में निवास करते हैं, ऐसी मान्यता भी प्रचलित है।
देवरिया ताल के आसपास घने जंगल, असंख्य वृक्ष, रंग-बिरंगे पुष्प व पशु-पक्षी देखने को मिलते हैं। इसे उत्तराखंड का बुग्याल क्षेत्र भी कहा जाता है। झील का पानी एक दम साफ है जिसमें आसपास के पहाड़ों की चोटियों के प्रतिबिंब स्पष्ट रूप से दिखता है। यहां से नीलकंठ, केदारनाथ, कालानाग, बंदरपूँछ इत्यादि चोटियों के प्रतिबिम्ब भी देखने को मिलते हैं।
देवरिया ताल पहुंचना बहुत आसान और सुगम है सबसे पहले आपको सारी गांव पहुंचना होगा क्योंकि यहीं से झील का सबसे छोटा और मुख्य ट्रेक शुरू होता हैं। यहां से देवरिया झील बस 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिसे पूरा करने में लगभग 1 से 2 घंटे का समय लगता है। ट्रेक ज्यादा मुश्किल भी नही है और रास्ते में आप घने जंगलों से होते हुए निकलते हैं जहां सुगंधित पुष्प व कई तरह के पक्षियों के चहचहाहट सुनने को मिलेगी।

यहां पर रुकने के लिए अपना टेंट व खाना आदि साथ लेकर आये क्योंकि ज्यादातर कैंप ट्रेवल कंपनियों के द्वारा पहले से बुक किये गए लोगों को ही दिए जाते हैं। इसके अलावा आप देवरिया ताल घूमकर वापस नीचे सरी गांव में आ सकते हैं। यहां स्थानीय लोगों के द्वारा किराया लेकर होमस्टे की सुविधा भी दी जाती है। इसके अलावा आप वापस उखीमठ जा सकते हैं जहां आपको सरकारी विश्रामगृह, बड़े होटल, हॉस्टल, लॉज इत्यादि सभी सुविधाएं आसानी से मिल जाएं गी।
देवरिया ताल सैलानियों के लिए 12 महीने खुला रहता है यहां आप कभी भी आ सकते हैं। मुख्यतया लोग मई से नवंबर के बीच में यहां आते हैं क्योंकि उस समय हल्की ठंड पड़ती है और तुंगनाथ मंदिर भी खुला रहता है। यदि आप बर्फबारी का मजा लेना चाहते हैं तो दिसंबर से फरवरी के महीने में यहां जा सकते हैं। इस दौरान यहां भीषण बर्फबारी होती है और लगभग 10-10 फुट तक बर्फ जम जाती है। इस समय सारी गाँव से चोपता तक का रास्ता भी बंद हो जाता है जिस कारण तुंगनाथ मंदिर भी बंद हो जाता है।
हालांकि सारी गांव से देवरिया ताल होते हुए तुंगनाथ मंदिर और फिर चंद्रशिला पहाड़ी पहुंचा जा सकता है क्योंकि यह रास्ता वर्षभर खुला रहता है। देवरिया ताल से आप तुंगनाथ मंदिर, चंद्रशिला पीक, चोपता गांव, उखीमठ के मंदिर, कस्तूरी मृग अभ्यारण्य, रुद्रनाथ मंदिर,अनुसूया माता मंदिर, कल्पेश्वर महादेव मंदिर, गोपीनाथ मंदिर, कालीमठ, गौरीकुंड, मनसा देवी मंदिर भी घूमने जा सकते हैं। तो अब देर किस बात की मौसम के हालात को देखते हुए आप निकल पढ़िए एक शानदार ट्रैक पर।
