Cyber Crime: ठगी का निकला नया फार्मूला डीप फेक आइडिया
पहले आवाज की रिकॉर्डिंग करते हैं डब, फिर चेहरा और आवाज होगी आपकी
रुद्रपुर, अमृत विचार। आधुनिकता की दौर में जहां साइबर क्राइम पुलिस अपने को लगातार अपडेट करती है। उससे पहले साइबर ठग अपने को अपडेट कर नये तरीके निजात कर डालते हैं। ऐसे में साइबर ठगों ने डीप फेक आइडिया बनाकर ठगी का शिकार बनाना शुरू कर दिया था। जिसका पहला मामला केरल में सामने आया है।
साइबर अधिकारियों का कहना है कि केरल में लाखों की ठगी डिप फेक तकनीकी से की गई है। इसमें साइबर ठग पहले परिवार में हो रही बातचीत को रिकॉर्ड कर उसे डब करते हैं और उसके बाद सॉफ्टवेयर से हुबहु वही आवाज निकालकर परिवार के सदस्य को कॉल कर ठगी को अंजाम देते हैं। केरल में पहला मामला सामने आने के बाद आशंका है कि जल्द ही ठग पूरे देश में भी इस अनोखे तरीके का प्रयोग कर सकते हैं।
सीओ साइबर सुमित पांडे ने बताया कि केरल से मांगी रिपोर्ट के आधार पर पता चला है कि साइबर ठग जब आवाज को रिकॉर्ड कर हुबहु आवाज निकालने की प्लानिंग करते हैं और कॉलर की फोटोयुक्त आईडी, मिलता जुलता मोबाइल नंबर से कॉल कर परिजन या फिर बेहद करीबी की आवाज में कॉल करते हैं। जब सामने वाला परिचित की आवाज को सुनता है तो उसे यह एहसास नहीं होता है कि यह कॉल साइबर ठग की हो सकती है।
वह आनन-फानन में मांगी गई रकम का भुगतान कर देता है और जब मामला पंजीकृत होगा तो निकलने वाली आईडी और आवाज नकली होगी। जिसके बाद आरोपी को पकड़ पाना संभव सा हो सकता है। उन्होंने बताया कि डीप फेक ठगी पर पहले से ही अंकुश लगाने के लिए साइबर थाना पुलिस मंथन शुरू कर रही है।
ठगी से ज्यादा अशांति का सता रहा है खतरा
केरल में डीप फेक तरीके से हुई ठगी के बाद साइबर क्राइम पुलिस को ठगी से नहीं, बल्कि आवाज से भय लगने लगा है। क्योंकि ठगी प्रकरण में ठगी का शिकार व्यक्ति होगा। आवाज के माध्यम से सांप्रदायिक भड़काऊ भाषण या फिर अराजकता फैलाना भी आसान होगा। इससे जिस व्यक्ति की आवाज में अशांति फैलाने की कोशिश होगी। उसका पता करना बेहद मुश्किल होगा। इस पहले की डीप फेक साइबर ठग सक्रिय हो उनके नेटवर्क को तोड़ने के लिए साइबर क्राइम पुलिस गंभीर होने लगी है।
सावधानी ही रोक सकती है मंसूबों को
कुमाऊं साइबर क्राइम थाना पुलिस प्रभारी ललित मोहन जोशी ने बताया कि केरल में जिस प्रकार डीप फेक तरीके से ठगी होने की सूचना प्राप्त हुई है। उससे ज्यादा अशांति फैलाने की आशंका हो सकती है। ऐसे में इस प्रकार के साइबर ठगों पर अंकुश लगाने का बेहद सरल रास्ता लोगों की जागरूकता है। बताया कि यदि फोटोयुक्त आईडी या फिर चित-परिचित की आवाज में पैसा मांगने, धार्मिक स्थल पर आपत्तिजनक वस्तु फेंकने या फिर रंगदारी जैसे प्रकरणों में जल्दबाजी नहीं करें और तस्दीक करने की कोशिश करें। कॉलर द्वारा कॉल किसकी थी और तस्दीक करने के बाद ही अगला कदम उठाएं। तभी डीप फेक गैंग पर अंकुश लगाया जा सकता है।
