बदायूं: नोटिस देकर सपा कार्यालय और 3 दुकानों पर चला बुलडोजर
सपा कार्यालय पर चस्पा किया था नोटिस, साक्ष्य प्रस्तुत न करने पर तोड़ा गया कार्यालय
उसावां, अमृत विचार। माफियाओं के भवन और अवैध निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री के निर्देश पर बुलडोजर की कार्रवाई जारी है। मंगलवार को प्रशासन ने पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बने समाजवादी पार्टी का कार्यालय और तीन दुकानों पर बुलडोजर चलाया। अवैध निर्माण बताते हुए भवन धराशायी कर दिया। एक मकान के कुछ हिस्से को तोड़ा। मकान स्वामी को साक्ष्य प्रस्तुत करने का समय दिया गया है। दुकान मालिकों ने प्रशासनिक अधिकारियों से बहस की। वहीं सपा कार्यकर्ता आक्रोशित नजर आए।
मामला नगर पंचायत उसावां का है। 15 जुलाई को सपा कार्यालय पर नोटिस चस्पा किया गया था कि कार्यालय लोक निर्माण विभाग की जमीन गाटा संख्या 1410 पर अवैध रूप से बना है। कहा था कि इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता कार्यालय में उपस्थित होकर साक्ष्य मुहैया कराने को कहा गया था।
लेकिन मामले की पैरवी कर रहे अमरपाल यादव ने अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए। जिसके बाद लोक निर्माण विभाग की ओर से एक और नोटिस जारी करके कार्यालय खाली करने और कार्यालय कहीं और शिफ्ट करने को कहा। इसके बाद भी भवन को खाली नहीं कराया गया। जिसके चलते जिला प्रशासन ने कार्यालय ध्वस्त करने का निर्देश दिया।
जिसके अनुपालन में तहसील दातागंज के नायब तहसीलदार छविराम सिंह, राहुल सिंह, लेखपाल राम प्रताप सिंह, लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता रवि कुमार व अभिषेक कुमार, सहायक अभियंता अभिषेक सिंह, उसावां थानाध्यक्ष रामेंद्र सिंह पुलिस बल के साथ कस्बा उसावां स्थित समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यालय पहुंचे।
सपा कार्यालय को तोड़ने की तैयारी की। सपा नेता अमरपाल यादव ने कहा कि जमीन को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल है। जिसकी मंगलवार को सुनवाई होनी थी। उन्होंने अवर अभियंता को याचिका संबंधी कॉपी दिखाई। अधिकारियों ने नोटिस दिखाते हुए भवन को बुलडोजर ध्वस्त करा दिया।
वहीं कार्यालय के पास में ही विधवा सत्यवती के मकान को भी अवैध बताया गया। हिला ने बताया कि उनके पति ने 2004 में वह मकान कस्बा निवासी अमरपाल कोरी से खरीदा था। उस दौरान इस बात की जानकारी थी कि सपा कार्यालय और पीडब्ल्यूडी के बीच कोई विवाद चल रहा है लेकिन मकान के संबंध में कुछ नहीं बताया गया था।
आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने 10 मिनट पहले उनके बेटे अनुज को नोटिस दिया और मकान खाली करने को बोला। महिला की बेटी रीता ने अधिकारियों से बात की तो अधिकारियों ने अनसुना कर दिया। मकान की दीवारें तोड़ दी। रीता ने अपने साथ पक्षपात के अंतर्गत कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। जिसके बाद अधिकारियों ने महिला के मकान को तोड़ने का काम रोक दिया और अपने अभिलेख समेत प्रस्तुत होने को कहा।
वर्ष 1976 में पट्टे पर जमीन आवंटित हुई थी। जहां भवन का निर्माण कराया था। उस जमीन का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। लोक निर्माण विभाग की ओर से लगभग 50 लोगों को नोटिस जारी किए थे। संबंधित अभिलेख जेई और एई को दिखाए गए थे। जो उन्होंने नहीं माने। कोर्ट में मामला होने के बाद भी द्वेषभावना से पार्टी के कार्यालय को तोड़ा गया है--- आशीष यादव, सपा जिलाध्यक्ष।
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