जनहित में कार्यकाल विस्तार

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Edited By Amrit Vichar
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उच्चतम न्यायालय ने व्यापक जनहित के मद्देनजर प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक संजय मिश्रा के कार्यकाल को आगामी 15 सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। इससे पहले शीर्ष अदालत ने ईडी निदेशक को लगातार दो बार एक-एक साल का कार्यकाल विस्तार दिए जाने को 11 जुलाई को ‘गैरकानूनी’ बताया था और नवंबर तक के लिए मिश्रा के कार्यकाल विस्तार को छोटा करके जुलाई 31 तक कर दिया था।

गुरुवार को केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि कुछ पड़ोसी देशों की मंशा है कि भारत वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की ‘संदिग्ध सूची’ में आ जाए और इसलिए ईडी प्रमुख पद पर निरंतरता जरूरी है। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि एफएटीएफ कमेटी 3 नवंबर से साइट विजिट पर आ रही है। विस्तार न करने से नकारात्मक छवि बन सकती है। ऐसे अन्य देश भी हैं जो यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत  ग्रे सूची में आ जाए।

गौरतलब है कि एफएटीएफ़ की ‘इन्क्रीज्ड मॉनिटरिंग लिस्ट’ को ही ग्रे लिस्ट कहा जाता है। ग्रे लिस्ट में उन देशों को शामिल किया जाता है जो कि अपने फाइनेंसियल सिस्टम को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उपयोग होने देते हैं। साथ ही जो देश आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों का पूर्ण और प्रत्यक्ष रूप से समर्थन करते हैं उन्हें ब्लैक लिस्ट में सूचीबद्ध किया जाता है। जब कोई देश ग्रे लिस्ट में शामिल कर लिया जाता है तो उसे विश्व बैंक, आईएमएफ, एशियाई विकास बैंक और देशों के आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कमी आती है और अर्थव्यवस्था कमजोर होती है। 

सुनवाई शुरू होने पर न्यायमूर्ति बीआर गवई ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि क्या हम यह तस्वीर नहीं दे रहे हैं कि आपका पूरा विभाग अक्षम व्यक्तियों से भरा है और केवल एक ही व्यक्ति सक्षम है। अदालत ने कहा सामान्य परिस्थितियों में हम इस तरह के आवेदन को स्वीकार नहीं करेंगे। व्यापक जनहित और राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए हम ईडी निदेशक को 15 सितंबर तक पद पर बने रहने की अनुमति देते हैं। साथ ही स्पष्ट किया कि इसके बाद कोई कार्यकाल विस्तार प्रदान नहीं किया जाएगा।

आज अदालत ने सरकार के तर्कों को कोई खास अहमियत नहीं दी। ध्यान रहे शीर्ष अदालन ने 11 जुलाई के आदेश में ईडी निदेशक के पिछले विस्तारों को तकनीकी आधार पर अवैध माना था न कि किसी चरित्र दोष या अक्षमता के आधार पर। परंतु उसका संदेश नकारात्मक गया। कहा जा सकता है कि आज के फैसले से सरकार को राहत मिली है।