भारत लगातार आगे
भारत को दुनिया के लिए कई मायनों में उदाहरण माना जा सकता है। विशेष रूप से जिस तरह यह देश दुनिया की सबसे बड़ी आबादी को स्थायी रूप से भोजन उपलब्ध कराता है, वो एक मिसाल है। लेकिन चुनौती ये है कि भूमि, मिट्टी, जल संसाधनों और देश की समृद्ध विविधता को नष्ट किए बिना या फिर शहरों में प्रदूषण की धुंध पैदा किए बिना, किस तरह ये उपलब्धि बरकरार रखी जा सकती है। गौरतलब है कि औद्योगीकरण की प्रगति के साथ वाणिज्यिक कृषि और अधिक कुशल नस्लों की आवश्यकता की वृद्धि हुई है। इससे पारंपरिक प्रजनन प्रणालियों का धीरे-धीरे क्षरण हुआ है और जैव विविधता का नुकसान हुआ है।
प्लास्टिक अपशिष्ट के कुशल प्रबंधन की कमी के कारण महासागरों में माइक्रोप्लास्टिक्स डंप किए जा रहे हैं जो समुद्री जीवन का गला घोंट रहे हैं। भारत में जैव विविधता के कई आकर्षक वैश्विक केंद्र हैं। फिर भी वनों की कटाई और वन क्षरण से वन और उनकी जैव विविधता खतरे में है, जो अभी भी चिंताजनक दर पर जारी है। इसी कारण संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक समुदाय से वनों की कटाई पर रोक लगाने” का आह्वान किया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जैव विविधता के संरक्षण, सुरक्षा, बहाली एवं उनके संवर्धन पर कार्रवाई करने में भारत लगातार आगे रहा है और अपने अद्यतन लक्ष्यों के माध्यम से देश ने और भी ऊंचे मानक तय किए हैं। भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से अपनी स्थापित विद्युत क्षमता को वर्ष 2030 के लिए निर्धारित लक्ष्य से नौ साल पहले ही हासिल कर लिया और अब अद्यतन लक्ष्यों के माध्यम से इसने अधिक ऊंचे मानक निर्धारित किए हैं।
उन्होंने बताया कि देश ने वर्ष 2070 तक ‘नेट जीरो’ हासिल करने का लक्ष्य रखा है। महत्वपूर्ण बात है कि भारत में किसी भी व्यक्ति, कंपनी या स्थानीय निकाय द्वारा किए जा रहे पर्यावरण-अनुकूल कार्यों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
देश में ‘ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम’ के तहत अब ग्रीन क्रेडिट अर्जित किया जा सकता है। वास्तव में बड़ी आबादी को खाना खिलाना और वनों की कटाई को रोकना परस्पर अासान नहीं है। इन दोनों लक्ष्यों को एक साथ प्राप्त करने के लिए देश में टिकाऊ उत्पादन प्रथाओं, कृषि वानिकी और अधिक संतुलित भूमि-उपयोग योजना पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। हमें ख़राब कृषि भूमि की उत्पादकता को बहाल करने, खाद्य हानि और बर्बादी को कम करने और उपभोक्ताओं को शिक्षित करने की आवश्यकता है।
