अमेठी: बारिश ने होने से चिंतित किसान, बच्चों ने काल-कलौटी खेल इंद्रदेव से मांगा पानी

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, अमेठी। बारिश न होने एवं सूखे के बनते आसार से चिंतित किसानों ने रविवार को जायस क्षेत्र के बघेल गांव में पानी के लिए इंद्रदेव को याद किया और काल कलौटी का आयोजन किया। काल कलौटी में भाग ले रहे बच्चे जोर-जोर इंद्रदेव को पुकारते रहे और जमीन पर डाले गए पानी में लोटते-पोटते रहे।

सूखे में भी बरसात के पानी में किलोल करने का आनंद लेते रहे। उनके साथ गांव के बड़े सयानों का भी समूह रहा जो उन्हें उत्साहित करता रहा। सुबह आठ बजे से शुरू हुआ काल कलौटी का सिलसिला अपराह्न 11 बजे तक जारी रहा। इस बीच बच्चों की टोली क्रमवार गांव के घर-घर तक पहुंची। घर के मुखिया हैण्डपम्प व समरसेबल से पानी निकालकर बच्चों पर डालते रहे।

पानी से भीगे बच्चे काल कलौटी उज्जर धोती मेघा सारे पानी दे नहीं तो अपनी नानी दे गाते रहे। बच्चों का नेतृत्व कर रहे वयोवृद्ध राम मिलन ने बताया कि काल कलौटी खेलने की परम्परा सदियों पुरानी है। जब-जब भी सूखा पड़ता है अथवा मानसून के आने में देर होती है तब-तब काल कलौटी खेलने एवं इंद्र को खुश करने के लिए पूजा पाठ किया जाता रहा है।

उन्होंने बताया कि हालांकि अब ये परम्पराएं समाप्त होती जा रही है। आधुनिक विचार के लोग इसमें विश्वास नहीं कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि काल कलौटी खेलने एवं इंद्रदेव को खुश करने के लिए की जाने वाली पूजा निरर्थक नहीं जाती। काल कलौटी के बाद इंद्र की पूजा कर हवन किया जाता है। शाम को यही बच्चे घर-घर से आलू, आटा मांगकर लाते हैं।

आग में आलू भूनकर सब्जी और आटे की मोटी मोटी रोटी बनाते है। इसे भगवान इंद्र को भोग लगाकर उनसे पानी बरसाने की याचना करते है। बाद में सभी बच्चे एक साथ बैठकर इस प्रसाद को चखते है। माना जाता है कि बच्चों के इस खेल से इंद्रदेव रीझ जाते हैं और खुश होकर पानी बरसाते हैं। अब यह मान्यता बारिश कराएगी या नहीं।

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