जसपुर: रिटायरमेंट के तीन दिन पहले बर्खास्त हुईं सीडीपीओ
फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी हासिल करने का मामला
जसपुर, अमृत विचार। अनूसूचित जाति के फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी प्राप्त करने के आरोप में बर्खास्त हुई जसपुर बाल विकास परियोजना अधिकारी लक्ष्मी टम्टा का नाम शादी से पूर्व लक्ष्मी पंत था। 1982 में अपनी शादी अनूसूचित जाति के मुकेश टम्टा से होने के बाद उन्होंने अपना नाम लक्ष्मी टम्टा रख लिया था।
अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाकर उसके बल पर नौकरी प्राप्त कर ली। उनकी नियुक्ति 8 अप्रैल 1988 में (उत्तर प्रदेश के समय ) बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय से सेविका (सुपरवाइजर) के पद पर हुई थी। उत्तर प्रदेश का विभाजन होने पर उत्तराखंड राज्य बनने के तीन वर्ष बाद वर्ष सन 2003 में बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर उनकी पदोन्नति हुई।
इसी बीच उनकी शिकायत हो गई। इस पर विभागीय जांच हुई। जांच के बाद वर्ष 2019 के सितंबर माह में तत्कालीन विभागीय निदेशक झरना कमठान ने सीडीपी को बर्खास्त कर दिया। उन्होंने अपनी बर्खास्तगी को बर्खास्तगी को चुनौती देकर 2023 के फरवरी माह में फिर से नौकरी हासिल कर ली।
बर्खास्त बाल विकास परियोजना अधिकारी 35 वर्ष की नौकरी भी पूर्ण कर चुकी थीं। 31 जुलाई को उनका रिटायरमेंट होने वाला था। लेकिन, रिटायरमेंट से मात्र 3 दिन पूर्व ही उनको बर्खास्त कर दिया।
इस कानून के तहत हुई कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के शासनादेश संख्या 22-39,1984 में स्पष्ट है कि यदि कोई सवर्ण स्त्री किसी अनुसूचित जाति, जनजाति के पुरुष से विवाह करती है तो उस स्त्री को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। उनकी नियुक्ति उत्तराखंड विभाजन से पहले हुई थी। इसी कानून के तहत वे फर्जीवाड़े में फंस गईं।
सात साल लग गए मामले की जांच में
इस मामले की जांच 7 वर्ष में पूरी हो पाई। जानकारी के अनुसार बर्खास्त बाल विकास परियोजना अधिकारी की शिकायत 6 जनवरी 2016 को हुई थी। इस पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास के निदेशक ने ऊधम सिंह नगर के मुख्य विकास अधिकारी को इस मामले की जांच सौंपी थी। लेकिन, आरोपी सीडीपीओ का मूल निवास अल्मोड़ा के दन्या में होने के कारण जांच प्रभावित हुई। इस पर निदेशक ने जांच डीएम अल्मोड़ा को सौंप दी थी। अल्मोड़ा डीएम द्वारा जांच किए जाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया।
