चीन का प्रेम
चीन हमेशा पाकिस्तान के जरिए भारत को घेरता रहा है। पाक अधिकृत कश्मीर और अरूणाचल के मामले में चीन हमेशा से दोहरे मानदंड अपनाता रहा है। हालांकि पाकिस्तान बड़े पैमाने पर आधिकारिक भ्रष्टाचार, उग्रवाद, अलगाववाद और राजनीतिक अस्थिरता की वजह से बदनाम है।
इसके बाद भी चीन इस क्षेत्र में भारत के विरोध के बावजूद महत्वपूर्ण वित्तीय निवेश कर रहा है। 60 अरब अमेरिकी डॉलर की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी)परियोजनाओं के आरंभ के 10 साल पूरे हो गए हैं। सीपीईसी बुनियादी ढांचा कार्यक्रम बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) की एक महत्वपूर्ण परियोजना है।
भारत के विरोध के बावजूद चीन ने सीपीईसी को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा है कि चीन अपने रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करना जारी रखेगा। महत्वपूर्ण है कि चीन के राष्ट्रपति का पाकिस्तान प्रेम संबंधी यह बड़ा बयान उस समय आया है जब इटली ने बीआरआई प्रॉजेक्ट से खुद को अलग करके चीन को झटका दिया है।
गौरतलब है कि इटली एकमात्र ऐसा पश्चिमी देश था, जिसने चीन के विशाल बीआरआई पर हस्ताक्षर किए थे, जो कई महाद्वीपों को सड़कों, रेलवे लाइनों और बंदरगाहों से जोड़ता है। बीआरआई ने चीन को दुनिया भर में अपना माल निर्यात करने में मदद की है, लेकिन इटली की तरह सभी देशों को इससे लाभ नहीं हुआ है।
इतालवी रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने एक इतालवी समाचार पत्र को बताया कि इटली बीआरआई का आलोचक है,क्योंकि जहां चीन को इटली के निर्यात में केवल मामूली वृद्धि देखी गई है, वहीं इटली को चीनी निर्यात तीन गुना बढ़ गया है। सीपीईसी पर भारी निवेश कर चीन ने अपने कई हितों को साधने की कोशिश की है।
ये परियोजनाएं चीन को हिंद महासागर और उससे आगे तक सीधी पहुंच प्रदान करती हैं, जो मध्य और दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाने की चीन की योजनाओं में एक बड़ी प्रगति है। भारत का कहना है कि यह परियोजना पाक अधिकृत कश्मीर से होकर जाती है जो हमारा इलाका है।
वहीं चीन अब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अपने सैनिकों को तैनात करके पाकिस्तान की मदद कर रहा है। चीनी एयरफोर्स के अधिकारी पीओके में स्थित स्कर्दू एयरबेस पर देखे गए हैं। सीपीईसी परियोजना में निवेश के बाद अब चीन की एसईजेड बनाने की तैयारी है। इसके बाद चीन का ग्वादर में नेवल बेस बनाने की योजना है। योजना सफल होती है तो यह भारत के लिए खतरा होगा।
