डेटा संरक्षण दिशा में

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से विकसित हो रही है। हमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों से बहुत सारा डेटा मिल रहा है। डिजिटलीकृत दुनिया में व्यक्ति, मशीनें, उद्यम और सरकारी एजेंसियां एक ही नेटवर्क पर जुड़ी हुई हैं जो डेटा उल्लंघनों और साइबर धोखाधड़ी के प्रति बेहद संवेदनशील साबित हुआ है। दैनिक जीवन में सरकार या निजी कंपनियों या लोगों से सेवाएं लेनी होती हैं। ऐसे में संवेदनशील सूचनाओं की गोपनीयता बनाए रखना एक चुनौती है।

हमारा आईटी उद्योग सभी प्रकार के डेटा का सबसे बड़ा प्रोसेसर है। विशिष्ट कानून के अभाव में डेटा का दुरुपयोग रोक पाना जटिल है लेकिन अब नागरिकों को जल्दी ही डेटा संरक्षण कानून मिलेगा। गुरुवार को सरकार ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक लोकसभा में पेश किया। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि डिजिटल माध्यम ने आर्थिक व्यवहार के साथ सामाजिक व्यवहारों को भी परिवर्तित कर दिया है।

व्यक्तिगत डाटा का सेवाओं और अन्य प्रयोजनों के लिए उपयोग एक सामान्य पहलू बन गया है। इसमें कहा गया है कि इस परिप्रेक्ष्य में डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीति के लिए वैयक्तिक डाटा संरक्षण एक पूर्व अपेक्षा बन गई है। विधेयक व्यक्तिगत डिजिटल डेटा के उपयोग को सुरक्षित करने की कोशिश करता है।

कानून लागू होने के बाद व्यक्तियों को अपने डेटा संग्रह, भंडारण और प्रसंस्करण के बारे में विवरण मांगने का अधिकार होगा। लोगों को मुआवजे का दावा करने का अधिकार होगा। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित इकाई पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। व्यक्तिगत अपराधों के लिए जुर्माना 10 हजार रुपये से शुरू होगा। 

अब आईटी कंपनियों को यह जानकारी साझा करनी होगी कि वे नागरिकों की कौन सी सूचनाएं अथवा आंकड़े जुटा कर, कितना संग्रहण तथा कितना किसी अन्य के साथ साझा कर रही हैं। निस्संदेह, अब डेटा संरक्षण कानून बनने के बाद इन कंपनियों को जवाबदेह बनाने में मदद मिलेगी। उम्मीद है इससे उनकी कार्यशैली में पारदर्शिता आएगी।

विरोधियों का कहना है कि यह निजता के अधिकार का उल्लंघन करने वाला और निगरानी राज स्थापित करने वाला विधेयक है। लेकिन कमियों के बावजूद, विधेयक उपयोगकर्ताओं को व्यक्तिगत डेटा का उपयोग करने के लिए अपनी सहमति देने, समीक्षा करने और वापस लेने का अधिकार देता है।

दरअसल, हमारे देश में उपभोक्ताओं की निजता व डेटा सुरक्षा के लिए पहल करने में बहुत देर हुई है। विकसित देशों ने बहुत पहले ही अपने नागरिकों के हितों के संरक्षण की दिशा में कदम उठा लिए थे। कुल मिलाकर, यह विधेयक नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा और निजता के अधिकार की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण पहला कदम है।