वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा
जलवायु प्रभावों के कारण कृषि उपज में गिरावट और बढ़ती मंहगाई में किसानों के लिए फसल उत्पादन करना कठिन होता जा रहा है। किसानों की स्थिति में सुधार लाने के लिए कई सरकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। सरकार कृषि में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने के लिए जैविक और जैव उर्वरकों के संयोजन के साथ मृदा परीक्षण के मद्देनजर उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा दे रही है।
शुक्रवार को रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा ने लोकसभा में बताया कि परंपरागत कृषि विकास योजना, नमामि गंगे, भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए मिशन जैविक मूल्य श्रृंखला विकास, राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना आदि के तहत किसानों को जैविक और जैव उर्वरकों के उपयोग के लिए सहायता प्रदान की जाती है।
देश में आर्थिक सुधारों की शुरुआत से ही बढ़ते उर्वरक सब्सिडी बिल पर नियंत्रण रखने के लिए उर्वरक क्षेत्र में सुधार के लिए कई प्रयास किए गए हैं। पीएम-प्रणाम योजना के तहत पिछले तीन वर्षों की औसत खपत की तुलना में रासायनिक उर्वरकों (यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी) की खपत में कमी के माध्यम से एक विशेष वित्तीय वर्ष में राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश द्वारा उर्वरक सब्सिडी का जो 50 प्रतिशत बचाया जाएगा, उसे अनुदान के रूप में उस राज्य को दिया जाएगा।
साथ ही एक राष्ट्र एक उर्वरक योजना के तहत किसानों को कम कीमत पर खाद व उर्वरक उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का लक्ष्य डीएपी (डाइ-अमोनियम फॉस्फेट), एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम) सहित सभी प्रकार के उर्वरकों को शामिल करके, देश भर में उर्वरक ब्रांडों को मानकीकृत करना है, भले ही इसे बनाने वाली कंपनी कोई भी हो।
इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करने में सहायता मिल सकेगी। साथ ही किसानों से अधिक पैसे वसूलने की समस्या का समाधान हो सकेगा। उर्वरक निर्माताओं को अपने उत्पादों को एक ‘भारत’ ब्रांड के तहत बेचने की आवश्यकता होगी। केंद्र सरकार का यह विचार अव्यवहारिक प्रतीत होता है क्योंकि इसका क्रियान्वयन कठिन होगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक जैव-उर्वरक सस्ते, नवीकरणीय और पर्यावरण-अनुकूल हैं , यदि सही तरीके से उपयोग किया जाए तो पौधों के पोषक तत्वों को पूरक करने की काफी संभावना है। मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जैव उर्वरकों का उपयोग आवश्यक है, क्योंकि रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी में उपलब्ध सभी सूक्ष्मजीव मर जाते हैं, जो मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक हैं। हमें अपना ध्यान जैव-उर्वरक पर केंद्रित करने की आवश्यकता है। वैकल्पिक उर्वरक विकसित करने के लिए नवाचारों को बढ़ाने और उनमें सुधार करने की आवश्यकता है।
