Kanpur: GSVM Medical College में आने वाले मरीजों के लिए अच्छी खबर, ग्लूकोमा वाल्व से अंधापन होगा दूर, पढ़ें- पूरी खबर

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में मरीजों का दूर होगा अंधापन।

कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में मरीजों का अंधापन दूर होगा। मरीजों की आंखों में अब ग्लूकोमा वाल्व लगाया जाएगा। जिससे तुरंत दिखेगा। अमेरिका से प्रशिक्षित टीम ने ग्लूकोमा वाल्व सर्जरी का प्रशिक्षण दिया।

कानपुर, अमृत विचार। जीएसवीएम मेडिकल में आने वाले ग्लूकोमा के गंभीर मरीजों का भी अब अंधापन दूर हो सकेगा। ग्लूकोमा वाल्व लगवाने के बाद मरीजों की खोई हुई आंखों की एक बार फिर से रोशनी आएगी और वह फिर से सब कुछ स्पष्ट रूप से देख सकेंगे। अभी ग्लूकोमा के मरीजों को दिल्ली के एम्स और लखनऊ के एसजीपीजीआई के चक्कर काटने पड़ रहे थे। 

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में शनिवार को ग्लूकोमा वाल्व कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला, उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरी, हैलट अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. आरके सिंह, नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रो. शालिनी मोहन व डॉ. पारुल सिंह ने दीप प्रज्जवलन से की।

इसके बाद अमेरिका से प्रशिक्षित एजीवीआईएएनएस हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश शर्मा, सेल्स हेड सुनील कुमार व संजीव कौशिक ने ग्लूकोमा सर्जरी के आधुनिक उपचार की जानकारी दी। बकरे की आंखों में 184 एमएम की ग्लूकोमा वॉल्व लगाने का प्रशिक्षण जूनियर डॉक्टर व वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञों को दिया।

प्रशिक्षण के बाद नेत्र सर्जन, सभी एसआर व जेआर को ग्लूकोमा वाल्व के अविष्कारक डॉ. मतीन अहमद द्वारा दिए गए प्रामण पत्र से सम्मानित किया गया। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रो. शालिनी मोहन ने बताया कि मरीजों में ग्लूकोमा गंभीर होने पर लेसर, दवा व ग्लूकोमा के ऑपरेशन विधि काम नहीं आती है। न ही उनकी आंखों का प्रेशर कंट्रोल हो पाता है। ऐसे में मरीजों को दिखना बंद हो जाता है।

इलाज के लिए मरीजों को दिल्ली व लखनऊ जाने की सलाह दी जाती थी, लेकिन अब जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में ही मरीजों का अंधापन दूर होगा। गंभीर ग्लूकोमा के मरीजों की आंखों में ग्लूकोमा वाल्व लगाया जाएगा। इसकी कीमत छह हजार रुपये से 20-25 हजार तक है। आयुष्मान कार्ड की मदद से भी यह ऑपरेशन कराया जा सकता है। इस संबंध में करीब 30 डॉक्टरों को वॉल्व लगाने का प्रशिक्षण दिया गया है।

इस दौरान डॉ. नम्रता पटेल, डॉ.दिलजीत सिंह, डॉ.एकता अरोड़ा, डॉ.सुरज मिश्रा, डॉ. गौरव सिंह, डॉ.लोकेश अरोड़ा, डॉ. रुचिका अग्रवाल व डॉ. नेहा समेत आदि डॉक्टर रहे। 

ऐसी कार्यशाला यूरोप व अमेरिका में होती 

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बताया कि ऐसी कार्यशाला यूरोप व अमेरिका के अधिवेशन में होती है, जो अब जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हुई है। मेडिकल कॉलेज में इस तरह की सर्जरी पहली बार होगी। नेत्र रोग विभाग की विभागाध्यक्ष की यह तकनीक मरीजों के काफी फायदेमंद साबित होगी। साथ ही ग्लूकोमा के मरीज एक बार फिर से दुनिया देख सकेंगे। 

प्रो.शालिनी मोहन ने 25 माह किया था शोध 

नेत्र रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. शालिनी मोहन ने ग्लूकोमा के गंभीर मरीजों को दिक्कत न हो सके, इसलिए उनकी आंखों में ग्लूकोमा वाल्व लगाने की तकनीक पर शोध किया गया था। 25 माह में प्रोफेसर ने 49 मरीजों की आंखों के बाहरी हिस्से (स्कलेरा ) में यह वाल्व लगाया, जिसके परिणाम बेहतर सामने आए। इस मरीज की आंखों का प्रेशर कंट्रोल होने लगा। साथ ही ऑपरेशन के कुछ समय बाद ही उनको दिखने भी लगा।

संबंधित समाचार