बदलेंगे समीकरण

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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मोदी उपनाम को लेकर की गई टिप्पणी के संबंध में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दोष सिद्धि पर उच्चतम न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने के तीन दिन बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की लोकसभा सदस्यता सोमवार को बहाल कर दी गई। कांग्रेस के लिए तो ये जश्न मनाने के पल हैं। कहा जा सकता है कि राहुल के सांसद के तौर पर पुन: सक्रिय होने के बाद राजनीति के तेवर और समीकरण भी बदलेंगे।

अब वह नए उत्साह, नए जोश के साथ विपक्षी गठबंधन को आगे दौड़ाने में जुटेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है कि विपक्षी गठबंधन को एक मौका मिला है और इस प्रकरण से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करेगा। ध्यान रहे मोदी उपनाम पर टिप्पणी के लिए मानहानि के एक मामले में राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में ट्रायल कोर्ट की आलोचना की थी, क्योंकि वह मानहानि के इस मामले में अधिकतम सजा देने के औचित्य को लेकर कोई भी तर्क देने में विफल रहा।

हालांकि सर्वोच्च अदालत ने राहुल गांधी को भी एक जन-प्रतिनिधि के नाते नसीहत दी कि वह सार्वजनिक मंच से सोच-समझ कर बयान दें, क्योंकि सांसद के बयान, कथन का असर व्यापक होता है। उससे जन-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और किसी व्यक्ति, जाति, समुदाय, संगठन का अपमान भी होता है।
किसी के मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन भी होता है। यानि सर्वोच्च अदालत ने संवैधानिक सरोकारों के मद्देनजर अधिकतम सजा पर रोक लगाई है। यह वायनॉड के नागरिकों की जीत है। ‘भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल को मिली नई पहचान के साथ हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में मिली चुनावी सफलताओं से कांग्रेस  में उत्साह है। उसके नेतृत्व में बना विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इनक्लूज़िव एलाएंस) सरकार के खिलाफ सामूहिक रुप से आक्रामक है।

गौरतलब है कि राहुल गांधी के खिलाफ 13 अन्य आपराधिक मामले भी अदालतों में विचाराधीन हैं। एक कथित घोटाले में वह जमानत पर हैं। अभी से उन्हें ‘इंडिया’ का कप्तान मान लेना और प्रधानमंत्री पद की ‘स्वाभाविक पसंद’ मानना जल्दबाजी ही कहा जा सकता है। पिछले काफ़ी समय से राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी की भावी राजनीतिक दिशा और वैचारिक सोच के स्तर पर साफ नज़र आते हैं। राहुल गांधी की जो छवि इन दिनों बनी है उसको सुरक्षित रखने के लिए उन्हें थोड़ा भाषा को भी मर्यादित रखना पड़ेगा। अब राहुल गांधी को संसद में सकारात्मक विपक्ष की तरह अपनी भूमिका निभानी चाहिए तथा जनहित के मसलों पर सरकार को घेरना चाहिए।