कानपुरवासियों के लिए अच्छी खबर, जापान की मदद से बनेगा बाइक जितना बड़ा ट्रैक्टर, CSA व Japan की कंपनियों में होगा करार

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Edited By Amrit Vichar
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सीएसए कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय और जापान मिलकर बनाएंगे सस्ते कृषि उपकरण।

सीएसए कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय और जापान मिलकर सस्ते कृषि उपकरण बनाएंगे। विश्वविद्यालय के शाक भाजी अनुसंधान अनुभाग की एक हेक्टेयर भूमि पर इकाई लगाई जा रही।

कानपुर, अमृत विचार। यह खबर खेती- किसानी के लिए  राहत भरी है। किसानों को जल्दी ही  ट्रैक्टर, थ्रेशर, कल्टीवेटर जैसी भारी भरकम मशीनों की जगह छोटे, हल्के और सस्ते कृषि उपकरण मुहैया हो सकते हैं। इन्हें न सिर्फ चलाना काफी आसान होगा, बल्कि कम जगह पर सुरक्षित भी रखा जा सकेगा।

इनमें ट्रैक्टर तो बाइक जैसा होगा। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शाक भाजी  अनुसंधान अनुभाग की एक हेक्टेयर भूमि पर जापान की प्रसंस्करण इकाई खुलने जा रही है। यहां विश्वविद्यालय और प्रदेश सरकार के सहयोग से ऐसे उपकरण विकसित किए जाएंगे।

जापान के कृषि विशेषज्ञों और कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने मंगलवार को सीएसए कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के परिसर, कृषि विज्ञान केंद्र और अनुभाग का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रोजेक्ट कार्यों और नई प्रजातियों को देखा। माना जा रहा है कि जापान की कई कंपनियों और विश्वविद्यालय के बीच जल्द ही शैक्षिक और शोध कार्यों को लेकर करार हो सकता है।

जापान की मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर, फॉरेस्ट्री एंड फिशरीज के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. काजूमी फ्यूजीमोतो और काउंसलर फॉर इमर्जिंग रीजन डिविजन साउथ एशिया एक्सपोर्ट एंड इंटरनेशनल ब्यूरो डॉ. दैसुकी असानो और कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के विशेष सचिव अजय कुमार द्विवेदी सुबह सीएसए पहुंचे।

कुलपति डॉ. आनंद कुमार सिंह और डीन, डायरेक्टर के साथ शैक्षिक, शोध कार्यों, तकनीक, नई प्रजाति विकसित करने को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान डॉ. पीके उपाध्याय, डॉ.पीके सिंह, डॉ. डीपी सिंह, डॉ.आरके यादव, डॉ.राम बटुक सिंह, डॉ.अजय कुमार सिंह, डॉ.विजय कुमार यादव, डॉ.मनीष गंगवार, डॉ.राजीव, डॉ.अनिल कुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी उपस्थित रहे। 

नई प्रजातियां होंगी विकसित 

सीएसए और जापान तकनीक, मशीनरी और फॉर्म मॉड्यूल के साथ शिक्षा, अनुसंधान, स्टूडेंट एंड फैकेल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम में शामिल होंगे। चावल, मक्का, टमाटर, आलू, तिलहन, दलहन आदि की प्रजातियों के विकास पर सहमति बनी है। जापानी सरकार के प्रतिनिधियों के साथ विश्वविद्यालय के अधिकारी नियमित ऑनलाइन मीटिंग करते रहेंगे। जापान की एक दर्जन कंपनियां अपने उत्पाद और मशीनों को फार्म मॉड्यूल के रूप में प्रदर्शित करेंगी। वहां की आईसीनेट कंपनी शीघ्र ही विश्वविद्यालय के सब्जी अनुभाग प्रक्षेत्र पर कार्य शुरू करने जा रही है। 

लखनऊ में आज करेंगे बैठक 

जापान का दल बुधवार को प्रदेश सरकार के अधिकारियों के साथ लखनऊ में बैठक करेगा। शाक भाजी अनुसंधान अनुभाग के डॉ. डीपी सिंह के मुताबिक शासन की ओर से बजट दिया जा रहा है। जापान की कई अन्य टीमें दूसरे राज्यों में कार्य कर रही हैं। गुजरात में कार्य शुरू हो गया है। जापान के विशेषज्ञों ने बाइक की तरह ट्रैक्टर का डेमा दिया। यह छोटा सा होता है, लेकिन कृषि कार्यों के लिए बहुत उपयोगी है।

 

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