बरेली: रेलवे का सफर मुश्किल दौर में, जंक्शन पर बढ़ती जा रही हैं ट्रेनें और यात्री, कम होता जा रहा है स्टाफ
चेकिंग स्टाफ ही आधे से कम, 173 पदों पर काम कर रहे हैं सिर्फ 78 कर्मचारी
बरेली, अमृत विचार। रेलवे का अपना सफर किस कदर मुश्किल दौर में पहुंच गया है, बरेली जंक्शन भी इसकी जीती जागती मिसाल बन गया है। लगातार ट्रेनें और यात्रियों की संख्या बढ़ते जाने के बावजूद रेल स्टाफ तेजी से कम होता जा रहा है। जंक्शन पर तो स्टाफ बेहद कम हो ही गया है, टिकट चेकिंग स्टाफ भी आधे से ज्यादा घट गया है। इससे रेलवे कर्मचारियों काम का बोझ बढ़ गया है।
जंक्शन पर अलग-अलग ग्रेड पे के टिकट चेकिंग स्टाफ के 173 पद स्वीकृत हैं। इनकी तुलना में जंक्शन पर अब 78 लोगों का ही स्टाफ रह गया है जो स्वीकृत पदों का सिर्फ 41 प्रतिशत है। इनमें सीआईटी, टीटीई और टीसी के पद शामिल हैं। इस कमी की वजह से ज्यादातर ट्रेनों में एक-एक टीसी चलाया जा रहा है। जिन ट्रेनों में पांच लोगों का स्टाफ होना चाहिए, उनमें भी तीन से ज्यादा का स्टाफ नहीं चल रहा है। यह स्थिति भी कागजों पर है, असल में हाल इससे भी ज्यादा खराब है।
बरेली जंक्शन पर भी स्टाफ की और भारी कमी है। यहां तीन शिफ्टों में 10-10 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने की जरूरत है लेकिन तीन शिफ्टों में तीन-तीन स्टाफ की ही ड्यूटी लगाई जा रही है। यानी 30 लोगों की ड्यूटी का बोझ सिर्फ नौ लोगों पर आ पड़ा है। दस लोगों का अतिरिक्त स्टाफ पूजा और समर स्पेशल ट्रेनों के लिए भी चाहिए होता है जो नहीं है।
बता दें कि ट्रेनों में टिकट चेकिंग स्टाफ की संख्या एसी और स्लीपर कोचों की संख्या के आधार पर तय होती है। मुरादाबाद रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सुधीर सिंह टिकट चेकिंग स्टाफ की भारी कमी को स्वीकार करते हुए कहते हैं कि रेल प्रशासन प्मोरशन और नई भर्तियों के जरिए रिक्तियों को भरने की कोशिश कर रहा है।
इन ट्रेनों में सबसे खराब स्थिति
जंक्शन से चलने और गुजरने वाली करीब 25 ट्रेनों में चेकिंग स्टाफ चलता है। इनमें से 12371 हावड़ा-बीकानेर सुपरफास्ट, 15623 भगत की कोठी-कामाख्या एक्सप्रेस, 14313 लोकमान्य तिलक बरेली एक्सप्रेस, 14320-19 महाकाल एक्सप्रेस, 14003 और 14004 मालदा टाउन-नई दिल्ली एक्सप्रेस, 12372 बीकानेर-हावड़ा एक्सप्रेस, 14314 बरेली-लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस, 15624 कामाख्या-भगत की कोठी एक्सप्रेस आदि ट्रेनों की हालत सबसे खराब है।
ये भी पढ़ें- बरेली: 'कारपोरेट हित छोड़ मजदूर हित पर ध्यान दे सरकार'
