मुसीबत में चीन

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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अमेरिका और भारत के बीच बढ़ती नजदीकियों से चीन चिंतित है। दूसरी ओर अमेरिका के साथ तनाव ने चीन को यूरोप को लुभाने के लिए मजबूर कर दिया है। लेकिन वह यूरोपीय देशों को अमेरिकी गुट से दूर करने में विफल रहा है यूरोप चीन के खिलाफ हो रहा है, जैसा कि चीन पर जर्मनी की ताजा रणनीति और बेल्ट एंड रोड पहल पर इटली के पुनर्विचार से संकेत मिलता है।

चीन की अर्थव्यवस्था इस समय सुस्त है। अमेरिका और यूरोप में आर्थिक विकास धीमा हो गया है, जो चीन की निर्यात-उन्मुख अर्थव्यवस्था की प्रमुख धुरी है। महंगाई में गिरावट के बाद चीन की अर्थव्यवस्था अब अपस्फीति यानी डिफ्लेशन की मुसीबत में फंस चुकी है। युवाओं में बेरोजगारी की समस्या चरम पर है। चीन का दोहरा चरित्र भारत के साथ-साथ बाकी दुनिया के लिए भी चुनौती बनकर उजागर हो रहा है।

एक तरफ चीन बाली में जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत का हवाला देकर द्विपक्षीय संबंधों का राग अलाप रहा है। दूसरी ओर,वह अरुणाचल प्रदेश के भारतीय खिलाड़ियों के लिए स्टेपल वीजा जारी कर रहा है। उधर चीन के विदेश मंत्री चिन गांग के गायब होने को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।

चिन दिसंबर 2022 में विदेश मंत्री नियुक्त किए गए थे। 25 जून के बाद से वह सार्वजनिक रूप में नजर नहीं आए हैं। हालांकि चीन में मशहूर हस्तियों के अचानक गायब होने की घटनाएं आम रही हैं, लेकिन गांग चीन के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक थे। वह संयुक्त राज्य अमेरिका में चीन के राजदूत भी थे। चिन ने अशांत दौर के दौरान अमेरिका-चीन संबंधों को संभालने में सक्रिय भूमिका निभाई। बहुत ही कम समय में चिन का विदेश मंत्री के पद से हटना कई सवाल खड़े करता है, जिससे शी के शासन के भीतर अस्थिरता की धारणा और मजबूत हो गई है। 

चिन के स्थान पर वांग यी को जल्दबाज़ी में फिर से विदेश मंत्री नियुक्त किया गया। ऐसे समय में जब चीन विभिन्न आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है, चिन के निष्कासन से बीजिंग की मुश्किलें भी बढ़ेंगी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोहराया है कि भारत-चीन संबंध बहुत अच्छी स्थिति में नहीं हैं और इसका एक बड़ा कारण चीन द्वारा सीमा पर अपनी पिछली प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करना है। जब तक चीन सीमा पर यथास्थिति बहाल नहीं करता तब तक रचनात्मक बातचीत संभव नहीं होगी। यानि भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके चीनी जाल में फंसने की संभावना नहीं है।