Kanpur के GSVM Medical College में आने वाले मरीजों के लिए अच्छी खबर, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में बना IUI रूम

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर में निसंतान दंपती की जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में भरेगी गोद।

कानपुर में निसंतान दंपती की जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में गोद भरेगी। मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में आईयूआई रूम बना। सेंट्रीफ्यूज मशीन से पुरुषों के कमजोर शुक्राणु की क्षमता बढ़ाई जाएगी।

कानपुर, [विकास कुमार]। निसंतान दंपती को भी अब संतान का सुख प्राप्त हो सकेगा। इसके लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में आईयूआई रूम बनाया गया है, जहां पर सेंट्रीफ्यूज मशीन से पुरुषों के कमजोर शुक्राणु की क्षमता बढ़ाई जाएगी। 

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में कानपुर समेत आसपास के जिलों से भी महिलाएं इलाज व परामर्श के लिए आती है, जिनमें कई महिलाओं में गर्भधारण न होने की समस्या रहती है। जांच व इलाज के बाद भी कुछ महिलाएं मां का सुख नहीं भोग पाती। इस वजह से वह खुद को बाझ समझने लगती है। लेकिन कई केसों में पुरुष के कमजोर शुक्राणु भी जिम्मेदार होते हैं।

ऐसे केसों में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में पुरुषों के शुक्राणु की क्षमता बढ़ाई जाएगी। ताकि वह पिता बन सके। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. उरुज जहां ने बताया कि आईयूआई (इंट्रा यूटेरियन इंसेमीनेशन) तकनीक तब इस्तेमाल की जाती है, जब पुरुष के स्पर्म (शुक्राणु) अच्छी हालत में नहीं होते। सेंट्रीफ्यूज मशीन से कमजोर शुक्राणु की क्षमता बढ़ाई जाती है।

निषेचन ( महिला के अंडाणु व पुरुष के शुकाणु का मिलान ) को बढ़ावा देने के लिए शुक्राणु को सीधे महिला के गर्भाशय के अंदर रखा जाता है। यह स्वस्थ शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने का एक तरीका है, जो फैलोपियन ट्यूब तक पहुंचता है। यह कृत्रिम गर्भधारण सामान्य रूप से गर्भवती होने की संभावना को बढ़ा सकता है। 

गर्भाशय तक शुक्राणु के न पहुंचने पर होता बांझपन  

स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नीना गुप्ता ने बताया कि अक्सर शुक्राणु की गतिशीलता कम होने व महिलाओं में सर्वाइल म्युकस जैसी समस्याओं के चलते शुक्राणु गर्भाशय तक नहीं पहुंच पाते और बांझपन की समस्या हो जाती है। ऐसी स्थिति में आईयूआई तकनीक के जरिए शुक्राणु को गर्भाशय में डाला जाता है। सामान्य प्रक्रिया से गर्भधारण न होने पर ही आईयूआई की मदद ली जाती है। बांझपन के तमाम केस में आइयूआइ से गर्भधारण संभव है। इस विधि से निसंतान दंपती संतान की प्राप्ति का सुख प्राप्त कर सकता है।

 

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