आगे की चुनौतियां

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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भारत आज दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। अनुमान है कि 2030 से पहले भारत दुनिया में तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियोें  से महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित करते हुए विकसित देश बनाने का संकल्प लेने को कहा। ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के मायने ये हैं कि प्रत्येक व्यक्ति, नागरिक को ‘आर्थिक अवसर’ जरूर मिलने चाहिए।

निश्चित रूप से भारत एक बड़ी और जटिल अर्थव्यवस्था है जिसके समक्ष वृद्धि और विकास की अपनी यात्रा में कई चुनौतियां और अवसर मौजूद हैं। तीव्र आर्थिक विकास के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बेरोज़गारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। भारत में बेरोजगारी चिंता का विषय है। इसकी राष्ट्रीय दर करीब आठ फीसदी है।

राज्यों में तो बहुत ही बुरे हालात हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ‘विकसित अर्थव्यवस्था’ तब बन सकती है, जब बेरोजगारी के मुद्दे को गंभीरता से समझा जाए। विश्व बैंक ने भारत को फिलहाल ‘निम्न मध्यम आय’ वाली श्रेणी में रखा है, क्योंकि हमारी प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय वैश्विक स्तर पर बहुत कम है। भारत में आय और धन असमानता का उच्च स्तर पाया जाता है जिसमें समय के साथ वृद्धि हुई है।

असमानता के उच्च स्तर से सामाजिक अशांति, राजनीतिक अस्थिरता और निम्न आर्थिक विकास जैसी स्थितियां बन सकती हैं। सरकार को ऐसी प्रगतिशील कराधान नीतियों को लागू करके भारत में असमानता और गरीबी को संबोधित करना चाहिए जो आय और धन को अमीरों से गरीबों की ओर पुनर्वितरित कर सके। सरकार को महिलाओं, अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों और हाशिये पर स्थित अन्य समूहों को उनके लिए समान अधिकार, अवसर और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करके सशक्त बनाना चाहिए। 

भारत चालू खाता घाटे से लगातार जूझता रहा है, जिसका अर्थ है कि इसका आयात इसके निर्यात से अधिक है। हालांकि देश ने अपनी चुनौतियों का समाधान करने और अवसरों का लाभ उठाने के लिए विभिन्न सुधार किए हैं। उदारीकरण ने भारत को उच्च विकास दर प्राप्त करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत होने में मदद की है। भारत ने वैश्वीकरण को भी अपनाया है, जिसका अर्थ है विश्व अर्थव्यवस्था के साथ अपने खुलेपन और एकीकरण को बढ़ाना।

अगर सही नीतियां अपनाई जाएं और सुधार जारी रखे जाएं तो 2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। कुल मिलाकर यदि भारत अपनी आर्थिक चुनौतियों को दूर कर सके और अपने आर्थिक सुधारों को बनाए रख सके तो वह 21 वीं सदी में वैश्विक नेता बनने की क्षमता रखता है।