मुरादाबाद : कमल खिलाना रणनीतिकारों के सामने चुनौती...
भाजपा के पार्टी नियंताओं के लिए की मुरादाबाद सहित मंडल की सभी सीट प्रतिष्ठा परक, राष्ट्रीय प्रवक्ता जफर इस्लाम, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का दौरा जारी
आशुतोष मिश्र,अमृत विचार। अभी से मिशन 2024 में जुटी भाजपा की राह यहां आसान नहीं है। क्योंकि उप चुनाव में रामपुर सीट पर कब्जा करने वाले भाजपाइयों के सामने चुनौतियों का पहाड़ है। साल 2019 के चुनाव परिणाम इस बात की गवाही दे रहे हैं। यह सच भी है कि पार्टी ने मंडल में इस टास्क को गंभीरता से लिया भी है। पार्टी नेतृत्व लगातार इस मुद्दे पर काम भी कर रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और केंद्रीय मंत्री लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। लेकिन, यह बात भी दमदार है कि भाजपा को ऊसर में कमल खिलाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।
साल 2014 के आम चुनाव में भाजपा की लहर पांच साल बाद यानी 2019 में कमजोर पड़ गयी। बीते चुनाव में मंडल में भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया। हालांकि अन्य चुनावों में पार्टी का विजय अभियान जारी रहा। जबकि साल 2019 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को मुरादाबाद, संभल, रामपुर, अमरोहा, बिजनौर और नगीना में करारी हार का सामना करना पड़ा। अतिविश्वास में मुरादाबाद सीट पर कुंवर सर्वेश सिंह सपा के डा.एसटी हसन से बुरी तरह पराजित हो गए। संभल में डा.शफीकुर्रहमान बर्क, रामपुर में आजम खां, अमरोहा में कुंवर दानिश अली, बिजनौर में मलूक नागर और नगीना सुरक्षित सीट से गिरीश चंद्र जाटव जीत गए। तब सपा और बसपा में चुनावी गठबंधन था। मंडल में सपा को तीन और बसपा के खाते में भी तीन सीटें गयी थीं।
यह जरूर है कि उप चुनाव में रामपुर सीट पर भाजपा के घनश्याम लोधी ने इस सीट पर कब्जा जमा लिया। आजम खां की खाली सीट जीतने के बाद भाजपा की बांछे जरूर खिली हैं। यह जरूर है कि चुनावी शंखनाद के पहले भाजपा कार्यकर्ताओं को साधने में जुट गयी है। राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र नागर, प्रभारी मंत्री जितिन प्रसाद, मंत्री धर्मपाल सिंह, प्रदेशाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी टीम को समय-समय पर साध रहे हैं। लेकिन, मंडल के मुरादाबाद जिले की माटी भाजपा के कमल के लिए किसी रेगिस्तान से कम नहीं है। साल 2022 के विधान सभा चुनाव में प्रदेश भर में भाजपा और उसके गठबंधनों के पक्ष में आंधी चली। उसके बाद भी मुरादाबाद में पार्टी का सूखा दूर नहीं हो सका। जिले की छह में मात्र शहर सीट पर पार्टी का खाता खुला। वह जीत भी बड़ी मुश्किल वाली।
शहर सीट पर विधायक रितेश गुप्ता जीत बरकरार रखने में कामयाब तो हुए, मगर जीत का अंतर हजार में सिमट गया। मंडल की सभी 28 विधान सभा सीटों में मात्र 11 पर जीत मिली थी। बाद के उप चुनाव में रामपुर की सीट मिल गयी। उप चुनाव के बाद रामपुर की एक सीट अपना दल के खाते में चली आई है। यानी मंडल की 28 सीटों में 12 पर भाजपा और सहयोगी दलों के पास है। जिला पंचायत, विधान परिषद और नगर निकाय चुनाव में जरूर पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा है। राजनीतिक समीक्षक मानते हैं कि मंडल में भाजपा को सभी सीटों पर कमल खिलाना ऊसर में हरियाला लाने जैसा है। निवर्तमान क्षेत्रीय मंत्री हरिओम शर्मा की मानें तो अबकी लोक सभा चुनाव के समीकरण अलग हैं। पार्टी सभी सीटों पर सफलता अर्जित करेगी।
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