Kanpur News : मंडी से रसोई पहुंच रही कीटनाशक और केमिकल से रंगी सब्जियां, हो जाएं सावधान, नहीं तो…
कानपुर में मंडी से रसोई पहुंच रही कीटनाशक और केमिकल से रंगी सब्जियां।
कानपुर में मंडी से रसोई पहुंच रही कीटनाशक और केमिकल से रंगी सब्जियां। फलों को सुरक्षित और चमकदार बनाने में भी कीटनाशक का उपयोग हो रहा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा कराई गई जांच में खुलासा हुआ।
कानपुर, [कुशाग्र पांडेय]। शहर में इन दिनों मंडियों से कीटनाशक से रंगी सब्जियां और फल लोगों के घर की रसोई तक पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही बागों और खेतों में ही खतरनाक कीटनाशकों का उपयोग फलों और सब्जियों पर किया जा रहा है जो हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। सेब को सुरक्षित और चमकदार बनाने के लिए मोम का प्रयोग कारोबारी तो करते ही हैं बाग में ही फलों पर डिफेनोकोनाजोल कीटनाशक का उपयोग हो रहा है।
बैगन, शिमला मिर्च, टमाटर जैसी सब्जियों की फसल सुरक्षित रहे इसके लिए किसान कार्बेडाजिम, थियामेथोक्सम, साइजोफेमिड, डिफेनोकोनाजोल जैसे कीटनाशक उपयोग में ला रहे हैं। यह बात हम नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट कह रही है। शासन स्तर से विभिन्न जिलों में कराई गई जांच में नमूने फेल आने के बाद अफसरों के कान खड़े हो गए हैं। हालांकि इसे कैसे रोका जाए अभी तक इस पर कोई खास कवायद शुरू नहीं हो सकी है।
बैगन, परवल का कलर चटख रहे इसके लिए बाकायदा उसे नीला थोथा के घोल में डुबोया जा रहा है। फसल पर भी इसका छिड़काव किया जा रहा है। मोम से भी बैगन चमकाए जा रहे हैं। सब्जी अधिक दिन तक खराब न हो इसके लिए भी कारोबारी सिंथेटिंक रंग या मैलाकाइट ग्रीन के घोल में उन्हें डुबो रहे हैं। इस घोल में डूबने के बाद सब्जियां ताजी दिखने लगती हैं। उनका रंग भी खराब नहीं होता है। लेकिन यह सेहत के लिए उतनी हानिकारक हो जाती है। मोम के लेप की वजह से बैगन , टमाटर इतने चमकदार हो जाते हैं कि कोई भी धोखा खा जाए।
इस तरह खुद जांच लें सब्जियां
लिक्विड पैराफिन में डूबा हुआ एक रुई का टुकड़ा लें, इस टुकड़े से हरी सब्जी की बाहरी हरी सतह पर मलें। अगर रुई का रंग नहीं बदला तो समझो सब्जी को रंगा नहीं गया है। अगर रुई हरी हुई तो सब्जी केमिकल से रंग दिया गया है।
सब्जी को हरा रंग देने के लिए ज्यादातर मैलाकाइट ग्रीन का इस्तेमाल होता है। इसके उपयोग से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन के अनुसार यह मछली पालन उद्योग में ऐंटिफंगल एजेंट के रूम में उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग कपड़ा उद्योग में ऊन, रेशम, चमड़ा और कपास की रंगाई के लिए भी किया जाता है। अभियान चलाकर सब्जियों और फलों को रंगने के खेल को पकड़ेंगे।- विजय प्रताप सिंह, सहायक खाद्य आयुक्त
इन कीटनाशकों का ज्यादा प्रयोग
किसान बैगन, टमाटर, शिमला मिर्च आदि सब्जियों के लिए कार्बेडाजिम, थियामेथोक्सम, साइजोफेमिड, डिफेनोकोनाजोल, मेथोमिल, मेट्रोब्यूजिन थियामेथोक्सम का भी उपयोग कर रहे हैं। इसी तरह सेब के लिए डिफेनोकोनाजोल, लीची के लिए फ्लुबेंडियामाइड का उपयोग वे कर रहे हैं। इससे न सिर्फ फल और सब्जियों की फसल रोग मुक्त होती है उत्पादन पर भी अच्छा असर पड़ता है।
