बरेली: बीडीओ का आरोप, डीसी मनरेगा की रिपोर्ट झूठी
बरेली, अमृत विचार। बहेड़ी के गांव उतरसिया महोलिया में मनरेगा मजूदरों के नाम पर 5.43 लाख का फर्जी तरीके से भुगतान करने के मामले में बीडीओ ने डीसी मनरेगा की जांच रिपोर्ट को झुठला दिया है। बीडीओ का कहना है कि डीसी मनरेगा की जांच में न कोई गबन साबित हुआ था और न किसी से वसूली का आदेश जारी किया गया। 17 हजार रुपये अपात्रों के खाते में भेजने का उनके स्तर से की गई जांच में पता चला। जिसकी रिकवरी कर ली गई है।
बीडीओ के मुताबिक अगर गड़बड़ी हुई होती तो डीसी मनरेगा सीधे जिला स्तर से वसूली करा सकते थे। उतरसिया महोलिया गांव के मनोज की शिकायत पर तत्कालीन डीसी मनरेगा गंगाराम वर्मा ने मामले की जांच की थी। इस दौरान उन्हें पता चला कि होमगार्ड, बुजुर्गों, छात्र समेत पड़ोसी राज्य में रहने वाले कई लोगों के नाम पर मनरेगा के तहत 5.43 लाख रुपये का फर्जी भुगतान कर दिया गया।
उन्होंने अपात्रों की सूची भेजने के साथ बीडीओ को प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक से गबन की गई धनराशि की वसूली करने का आदेश दिया था। चार रिमाइंडर भेजे गए पर बीडीओ की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। जुलाई में उनका ट्रांसफर हो गया। तब से मामला ठंडे बस्ते में था। रविवार को अमृत विचार ने मामले को उठाया तो बीडीओ ने पूरा ठीकरा डीसी मनरेगा पर फोड़ दिया।
बीडीओ ठीक तो जवाब देने में इतनी देरी क्यों
तत्कालीन डीसी मनरेगा गंगाराम वर्मा का कहना है कि अब उनका दूसरे जनपद में ट्रांसफर हो चुका है। बरेली में तैनाती के समय खुद गांव में जाकर मामले की जांच की थी। गड़बड़ी मिलने पर रिकवरी कर उक्त धनराशि मनरेगा खाते में जमा कराने के लिए बीडीओ को पत्र लिखा था। इसके बाद कई बार रिमांइडर भेजे, मगर, छह महीने तक कोई जवाब नहीं आया। कहा कि बीडीओ अगर अपनी जगह ठीक हैं तो कई बार रिमांइडर भेजने के बाद जवाब क्यों नहीं दिया।
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