मुरादाबाद: न धूप की चिंता, न पांव के छालों की फिक्र, जुबां पर भोले ही भोले

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Edited By Amrit Vichar
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कांवड़ियों के मन में भोले की भक्ति की उमंग, हरिद्वार से जल भलकर लौटने वाले भी उत्साह में रहे

मुरादाबाद, अमृत विचार। मन में आस्था और भक्ति का जोश, फिर डगर में पैर में कंकड़ मिले या पत्थर परवाह नहीं। हरिद्वार और बृजघाट से गंगाजल भरकर ला रहे शिवभक्तों की आस्था के हिलोर के दम पर 200-250 किलोमीटर की दूरी तय करने पर जरा भी थकान नहीं। वह भोले बाबा की भक्ति की धुन में अपने गंतव्य की ओर बढ़ते जा रहे हैं।

पीतलनगरी की सड़कों पर सावन और अधिमास में हर दिन यही जोश और जज्बा कांवड़ियों में दिखा। 59 दिन के श्रावण और अधिमास में इस बार आठ सोमवार पड़े हैं। इस दिन शिवालयों में देवो के देव महादेव का गंगाजल, बेलपत्र फूल आदि से अभिषेक करने के लिए कांवड़ियों का जत्था आगे ही बढ़ता जा रहा है। कोई अकेले ही बाबा की धुन में चल रहा है तो भक्तों का जत्था डीजे पर बज रहे गीतों पर हर हर महादेव का जयघोष करते हुए डग बढ़ा रहे हैं।

 कोई बरेली, कोई रामपुर, कोई मुरादाबाद तो कोई आसपास के अन्य जिलों से भले हैं। लेकिन जात-पात का भेदभाव श्रावण में पूरी तरह से मिट गया है। तन पर केसरिया रंग के वस्त्र, कांधे पर कांवड़ में गंगाजल लटकाए बच्चे, बुजुर्ग, युवा, महिलाएं तेज चाल से अपने कदमों को बढ़ा रहे हैं। उनके सिर पर कभी तेज धूप पड़ रही है तो कहीं थोड़ी सी छांव। किसी के पैर में छाले हैं तो किसी ने पैरों के मांसपेशियों में दर्द को दबाने के लिए बैंडेज लगा रखा है मगर कदम रुकने को तैयार नहीं। वह तो बस अपने आराध्य की भक्ति में लीन शिवालय पहुंच कर जलाभिषेक और पूजा अर्चना करने को बेचैन है। यह भाव किसी एक के नहीं हर शिवभक्त के मन और चेहरे पर दिखा।

कांवड़ सेवा शिविरों और भंडारे में लोग भोले के भक्तों को प्रसाद देने के लिए आतुर हैं। शिवभक्तों की सेवा कर खुद को धन्य बनाने के लिए लोग कांवड़ियों के आगे पीछे फल, बोतलबंद पानी और प्रसाद लेकर आ रहे हैं। कोई ग्रहण करता तो कोई हाथ जोड़कर आगे बढ़ जाता। यह नजारा शिवभक्तों के रूप में भोलेनाथ की कृपा पाने की झलक दिखा रही थी।

हरिद्वार से कांवड़ लेकर आ रहे रामपुर के राहुल, मनोज का कहना है कि भोलेनाथ की भक्ति की शक्ति में दूरी और रास्ते के कष्ट कोई मायने नहीं रखते। उनके प्रति अगाध आस्था है। इसलिए परिवार की सुख समृद्धि और लोक कल्याण की भावना के साथ कांवड़ लेकर जा रहे हैं। शिवालय पर भोले बाबा का गंगाजल से अभिषेक करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

मिलक के योगेंद्र और रवि भी अपनी मन्नतों को पूरा कराने की आस लेकर गंगाजल उठाए पांव के छाले की परवाह किए बिना भगवान शंकर की भक्ति में लीन होकर कदम बढ़ा रहे थे। कहा भोलेनाथ की कृपा से कांवड़ लेकर जाने की हमेशा इच्छा रहेगी।

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