बरेली: प्रदूषण जांच केंद्रों की असलियत... थाने में सीज खड़ी कार का भी सर्टिफिकेट जारी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। अगर आप गाड़ियों की विंड स्क्रीन पर लगे पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) यानी प्रदूषणमुक्त होने का प्रमाणपत्र देखकर अनुमान लगा रहे हैं कि आपके शहर में ट्रैफिक से होने वाला वायु प्रदूषण नियंत्रण में तो आप भारी मुगालते में हैं।

पीयूसी सर्टिफिकेट का इससे दूर-दूर तक वास्ता नहीं है कि गाड़ी प्रदूषणमुक्त है क्योंकि ज्यादातर केंद्रों पर बगैर गाड़ियों की जांच किए ही ये प्रमाणपत्र बनाए जा रहे हैं। थाने में महीनों से सीज खड़ी गाड़ी का भी पीयूसी सर्टिफिकेट बन रहा है और सैकड़ों किमी दूर मेरठ में मौजूद गाड़ी का भी।

इतने धड़ल्ले से यह धांधली इसलिए हो रही है क्योंकि आरटीओ कार्यालय के अफसर जानकर अनजान बने हुए हैं।

गाड़ी चाहे कितना धुआं फेंक रही हो, उसकी पीयूसी सर्टिफिकेट बनवाना जरा भी मुश्किल नहीं है। रविवार को अमृत विचार संवाददाता ने पीयूसी सर्टिफिकेट जारी करने वाले केंद्रों पर चल रही धांधली का परीक्षण किया तो यह असलियत सामने आ गई।

थाना बारादरी में दो महीने से ज्यादा समय से एमवी एक्ट के मामले में सीज खड़ी कार (यूपी 25 सीएस 8728) का पीयूसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए किला रोड पर स्वालेनगर पेट्रोल पर बने प्रदूषण जांच केंद्र पर 110 रुपये मांगे गए।

सेंटर पर मौजूद शख्स को जब बताया गया कि कार घर पर खड़ी है तो उसने कहा कि कार लाने की जरूरत नहीं है। सिर्फ उसकी नंबर प्लेट का फोटो मंगा लो, सर्टिफिकेट बन जाएगा। नंबर प्लेट का फोटो देते ही पांच मिनट के अंदर उसने पीयूसी प्रमाणपत्र बनाकर दे दिया। ईसाइयों की पुलिया के पास एक प्रदूषण जांच केंद्र पर मेरठ में खड़ी गाड़ी का सर्टिफिकेट बना दिया गया।

अगर थाने में सीज कार का भी पीयूसी प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया है तो यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कराकर प्रदूषण जांच केंद्र के संचालक पर कार्रवाई की जाए। बगैर जांच सर्टिफिकेट जारी करने वाले दूसरे दूसरे सेंटर भी बंद कराए जाएंगे।

- संजय सिंह, उप परिवहन आयुक्त

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