Kanpur News : UPSIDA के बैकलॉग भर्ती घोटाले का मामला, विजिलेंस जांच की कहानी... कोऊ न समझी-जानी

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर में यूपीसीडा के बैकलॉग भर्ती घोटाले का मामला।

कानपुर में यूपीसीडा के बैकलॉग भर्ती घोटाले का मामला। साल भर में एक भी ठोस सुराग नहीं विजिलेंस टीम जांच में नहीं ढूंढ पाया।

कानपुर, [अभिषेक वर्मा]। इसे यूपीसीडा के बैकलॉग भर्ती घोटाले के आरोपियों का रसूख कहेंगे या फिर कुछ और कि एक साल बीत जाने के बाद भी विजिलेंस टीम उनके खिलाफ कोई ठोस सुराग नहीं ढूंढ पाई है। इस घोटाले की पूरी कहानी तत्कालीन आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग की जांच रिपोर्ट से पता चल सकती है, लेकिन विजिलेंस विभाग पता नहीं इतना सुस्त क्यों हैं कि अभी तक वह साक्ष्य नहीं जुटा पाया है।

अगर जांच रिपोर्ट और दस्तावेज को सामने रखेंगे तो घोटाले की एक-एक कड़ी सामने आ जाएगी, लेकिन इसके बाद भी अभी तक विजिलेंस की जांच पूरी क्यों नहीं हुई, यह बड़ा सवाल है। 

यूपीसीडा में 2008 से 2009 के बीच भर्ती घोटाला हुआ था। इस घोटाले में तत्कालीन सरकार के कई मंत्रियों और विधायकों के रिश्तेदारों को नौकरी दी गई थी। फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर भी कई आवेदनकर्ता नौकरियां पाने में सफल हो गए थे। इस घोटाले की जांच कई बार हुई, लेकिन कार्रवाई उन्हीं पर हुई जिनका कोई जुगाड़ नहीं था।

करीब एक साल पहले प्रदेश सरकार ने इसकी जांच कानपुर विजिलेंस को सौंपी थी, लेकिन यहां पर भी नतीजा सिफर है। एक साल बाद भी विजिलेंस टीम अभी तक ठोस सबूत नहीं ढूंढ पाई है, जिसके आधार पर वह अदालत में चार्जशीट दाखिल कर सके। 

2017 में हुआ था घोटाले का खुलासा 

इस घोटाले का खुलासा मार्च 2017 में तत्कालीन आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग द्वारा की गई जांच रिपोर्ट में हुआ था। आयुक्त ने स्पष्ट लिखा है कि वर्ष 2009 की नियुक्तियों के चयन समिति की कार्यवृत्त पत्रावली पर उपलब्ध नहीं है। इससे यह संदेह होता है कि चयन समितियों के कार्यवृत्ति बनाई ही नहीं गई है। इसी तरह वर्ष 2008 की चयन समितियों की बैठकों में जो कार्यवृत्त बनी उसे देखने के बाद यह स्पष्ट होता है कि कई समितियों की बैठक में अध्यक्ष या सदस्य नहीं थे फिर भी साक्षात्कार हुआ और अभ्यर्थी चयनित किए गए।
एक साल पहले दे दिए थे दस्तावेज
एक साल पहले पुलिस अधीक्षक विजिलेंस ने यूपीसीडा के सीईओ मयूर माहेश्वरी को पत्र लिखकर भर्ती प्रकिया संबंधी पत्रावलियां मांगी थीं। यूपीसीडा प्रबंधन ने उनको अब तक हुई जांचों का विवरण, नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के नाम, इंटरव्यू से जुड़े कागजात, प्रमाण पत्रों के सत्यापन संबंधी रिपोर्ट उपलब्ध करा दी थी। साथ ही पूर्व में बर्खास्त किए गए अधिकारियों व कर्मचारियों का विवरण भी उपलब्ध करा दिया था, लेकिन इसके बाद भी विजिलेंस अभी तक कोई ठोस साक्ष्य नहीं ढूंढ पाया है। जब इस संबंध में पुलिस अधीक्षक विजिलेंस टी राम से सवाल किया गया तो उनका रटारटाया बयान आया कि मामले की जांच हो रही हैं। इसके सिवा और कुछ नहीं बता सकते हैं। सवाल है कि आखिर विजिलेंस विभाग इतना सुस्त रवैया क्यों अपनाएं है।

 

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