बरेली : गोशाला बनाने पर नहीं किसी का ध्यान, एसडीएम को गोकशी का डर

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Edited By Amrit Vichar
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निराश्रित गोवंश की बढ़ती संख्या के मद्देनजर जिले की प्रत्येक न्याय पंचायत में बनाई जानी हैं दो-दो गोशालाएं

बरेली, अमृत विचार। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में निराश्रित गोवंश घूमते रहते हैं। यह गोवंश किसानों के लिए बड़ी समस्या बने हैं। इससे निजात दिलाने के लिए जिले की प्रत्येक न्याय पंचायत में दो-दो गोशालाएं बनाए जाना प्रस्तावित है। डीएम ने चार दिन पहले जिले की सभी तहसीलों के एसडीएम को पत्र भेजकर गोशालाओं के लिए जगह चिह्नित करने के निर्देश दिए, लेकिन बहेड़ी के एसडीएम ने जगह चिह्नित करने से साफ मना कर दिया।

एसडीएम ने तहसील के खंड विकास अधिकारियों से कहा कि गोशाला खुलने पर गोकशी की घटनाएं बढ़ने की संभावना है। ऐसे हुआ तो इसका जिम्मेदार वह स्वयं होंगे। इसके अलावा अन्य तहसीलों के एसडीएम ने भी पत्र का कोई जवाब नहीं दिया है। लिहाजा, शुक्रवार को कार्यवाहक सीडीओ ने सभी एसडीएम को रिमाइंडर भेजा है।

जिले में 144 न्याय पंचायतें हैं। डीसी मनरेगा मो. हबीब अंसारी ने बताया कि निराश्रित पशु किसानों के लिए बड़ी समस्या बने हुए हैं। पशु हमला करके कई लोगों को घायल कर चुके हैं।इस समस्या से निजात दिलाने के लिए मनरेगा से समस्त न्याय पंचायतों में 20 लाख रुपये से अधिक की लागत से दो-दो गोशालाएं बनाने का निर्णय लिया है। प्रधानों के सहयोग से मनरेगा मद से 60-60 गोवंश क्षमता वाली गोशालाएं संचालित की जानी हैं। इसके लिए चार दिन पहले डीएम ने सभी एसडीएम को जगह चिह्नित करने का आदेश दिया था लेकिन अब तक किसी ने प्रस्ताव नहीं भेजा है।

बहेड़ी तहसील में आने वाले सभी ब्लाॅक के बीडीओ पिछले दिनों एसडीएम बहेड़ी से मिलने गए तो गोकशी की वजह से गोशाला के लिए जगह चिह्नित नहीं करने की बात कहकर लौटा दिया। यह शिकायत डीसी मनरेगा के पास पहुंची है। कार्यवाहक सीडीओ तेजवंत सिंह ने बताया कि शुक्रवार को एक बार सभी एसडीएम को रिमांइडर भेजा गया है। जब तक जगह चिह्नित नहीं हो जाती तब तक गोशालाओं का निर्माण शुरू नहीं हो सकेगा।

वर्तमान में यह है गोशालाओं की स्थिति
ग्रामीण इलाकों में 30 अस्थाई गोशालाओं में करीब 1700 पशु संरक्षित हैं। इसके अलावा नवाबगंज, भुता, फतेहगंज पश्चिमी और मझगवां में गोशालाओं में भी करीब 1600 पशु संरक्षित किए गए हैं। जबकि शहरी क्षेत्र की आठ स्थाई और अस्थाई गोशालाओं में भी दो हजार से अधिक पशु संरक्षित होना का दावा किया जा रहा है। 1945 गोवंशीय पशु सुपुर्द किए गए हैं।

एसडीएम करें सहयोग तभी बनेगी बात
डीसी मनरेगा मो. हबीब अंसारी का कहना है कि उनके पास पर्याप्त बजट है। दो-दो गोशालाएं हर न्याय पंचायत में खोलने में एसडीएम रुचि नहीं ले रहे हैं। रिमांइडर भेजा जा रहा है। कहा कि जिस दिन जगह चिह्नित कर प्रस्ताव मिल जाएगा, उसके चार से पांच दिन बाद गोशाला का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। गोशालाएं ऐसी जगह खोली जानी हैं जहां स्थाई निर्माण हो सके। तालाब, खलिहान की भूमि को नहीं लिया जाएगा।

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