मणिपुर का संकट
मणिपुर में हिंसा भड़के हुए चार माह हो गए हैं,लेकिन स्थिति में कोई विशेष सुधार आता नहीं दिख रहा है। वहां हिंसा थम नहीं रही है। मणिपुर आए दिन बार-बार हिंसा की आग में जल रहा है। बीते मंगलवार और फिर गुरुवार को पुन: हिंसा भड़क उठी जिसमें भारी गोलाबारी हुई। हिंसा में कई लोग घायल हुए और चार लोगों की मृत्यु हो गई।
गौरतलब है कि मणिपुर में हिंसा की घटनाएं तब शुरू हुई जब हाईकोर्ट ने अप्रैल के महीने में राज्य सरकार को मणिपुर के बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजातियों को आरक्षण देने पर विचार करने को कहा। नगा और कुकी समुदाय ने मैतेई लोगों को आरक्षण देने का विरोध किया। इसके बाद हिंसा भड़क गई और हिंसा का ऐसा तांड़व हुआ कि समाज एक तरह से बंटा हुआ नजर आने लगा। हिंसा रोकने के लिए सेना को भी भेजा गया,लेकिन अभी तक वहां शांति की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है और सरकार भी अभी तक हिंसा रोकने का कोई ठोस तरीका नहीं निकाल पाई है।
बीती 30 अगस्त को संवैधानिक जरुरतों को लेकर मणिपुर विधानसभा का एक दिवसीय सत्र आयोजित हुआ जिसमें सत्र के अंत में राज्य में बातचीत के जरिए शांति स्थापित करने को लेकर प्रस्ताव पारित कर दिया गया। यहां यह अफसोस होता है कि बातचीत के जरिए राज्य में शांति स्थापित करने की बात तो की गई,लेकिन हंगामें के चलते सदन में हिंसा पर कोई भी चर्चा नहीं हो सकी। सत्र 11 मिनट ही चल सका और सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। यह भी गौर करने वाली बात है कि संसद का मानसून सत्र भी मणिपुर हिंसा पर चर्चा कराने को लेकर हंगामे की भेंट चढ़ गया था,लेकिन अभी तक हिंसा खत्म करने को लेकर देश में कोई विशेष विमर्श खड़ा नहीं हो सका है।
हालांकि देश की विपक्षी पार्टियां हिंसा पर सरकार से जवाब तो मांग रहीं हैं,लेकिन हिंसा पर काबू पाने के लिए कोई चर्चा करने को तैयार नहीं होती है। देश व प्रदेश की सरकार भी राज्य में शांत बहाली के लिए केवल अंधेरे में चीर चलाने का ही काम रही है। देश के नीति नियंताओं को यह भी समझना चाहिए कि इसी महीने देश में जी-20 सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है जिसकी थीम ‘वसुधैव कुटुंबकम’ अर्थात्ल ‘एक पृथ्वी-एक कुटुंब-एक भविष्य’ है। एक तरफ तो हम आयोजित सम्मेलन के माध्यम से ‘एक पृथ्वी-एक कुटुंब-एक भविष्य’ का संदेश दे रहे हैं,दूसरी तरफ देश में एक राज्य पिछले चार महीने से वैमनस्य की आग में झुलस रहा है और हम उसकी एकता के लिए कोई विशेष कदम नहीं उठा सके हैं। सरकार को राज्य में शांति बहाली के साथ एकता स्थापित करने पर भी ठोस प्रयास करने चाहिए ,तभी जी-20 जैसे सम्मेलन वास्तव में सार्थक होंगे।
