पीलीभीत: हापुड़ कांड पर नहीं थम रहा आक्रोश, फिर गरजे अधिवक्ता..
पीलीभीत, अमृत विचार। हापुड़ के अधिवक्ताओं पर पुलिस का लाठीचार्ज और उसके बाद दर्ज किए गए मुकदमे को लेकर आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसे लेकर एक बार फिर अधिवक्ता सड़कों पर उतरे और जुलूस के रूप से कलेक्ट्रेट पहुंचकर पुलिस मुर्दाबाद के जमकर नारे लगाए।
मुख्यमंत्री द्वारा प्रकरण को लेकर बनाई गई जांच कमेटी पर असंतुष्टता जताई। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम कार्यालय में सौंपा गया। जिसमें जांच कमेटी में बार काउंसिल के सदस्य और न्यायिक अधिकारी को शामिल करने की मांग की गई।
तय कार्यक्रम के तहत तीनों बार संगठनों से जुड़े अधिवक्ता हापुड कांड को लेकर शुक्रवार को भी न्यायिक कार्य से विरत रहे। जुलूस के रूप से में नारेबाजी करते हुए अधिवक्ता कलेक्ट्रेट स्थित डीएम कार्यालय पर पहुंचे। इस दौरान पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
डीएम कार्यालय में मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें बताया कि हापुड़ जिले में 29 अगस्त को अधिवक्ताओं पर पुलिस द्वारा की गई बर्बरतापूर्ण अमानवीय व्यवहार और मारपीट के बाद फर्जी मुकदमा भी दर्ज कर दिया गया। इस उक्त घटना की जांच को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा जो जांच कमेटी गठित की गई है, उससे अधिवक्ता संतुष्ट नहीं हैं।
इस तीन सदस्यीय जांच कमेटी में न तो कोई रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी है न ही बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश का सदस्य। ऐसे में जांच कमेटी की निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न बरकरार है। कमेटी में एक न्यायिक अधिकारी और बार काउंसिल के सदस्य को शामिल करने की मांग की।
इसके अलावा दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने, संलिप्त अधिकारियों का जनपद हापुड़ से स्थानांतरण, चोटिल अधिवक्ताओं को अति शीघ्र उचित मुआवजा की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में संयुक्त बार के महासचिव आनंद मिश्रा, सेंट्रल बार के अध्यक्ष कुलविंदर सिंह सहोता , सिविल बार के अध्यक्ष विवेक पांडेय, आलोक कुमार नगाइच, कुलदीप जौहरी, अंशुल गौरव सिंह, फैजान अली, स्नेहलता तिवारी, महासचिव विवेक अवस्थी, राजीव अवस्थी आदि थे।
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