सवाल भरोसे का
पूर्वी लद्दाख में चार महीने से चले आ रहे तनाव के बीच भारत और चीन ने पांच-सूत्रीय रोडमैप पर सहमति व्यक्त की है। इससे सीमा पर फिलहाल स्थिति काबू में रहने की उम्मीद बंधी है। गुरुवार को विदेश मंत्री एस.जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच हुई वार्ता में भारत ने चीन द्वारा …
पूर्वी लद्दाख में चार महीने से चले आ रहे तनाव के बीच भारत और चीन ने पांच-सूत्रीय रोडमैप पर सहमति व्यक्त की है। इससे सीमा पर फिलहाल स्थिति काबू में रहने की उम्मीद बंधी है। गुरुवार को विदेश मंत्री एस.जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच हुई वार्ता में भारत ने चीन द्वारा बड़ी संख्या में सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तैनाती के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया।
जयशंकर ने वांग से कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आगे विकास के लिए शांति संबंध आवश्यक है। विदेश मंत्री ने अपने चीनी समकक्ष को अवगत कराया कि हाल ही में पूर्वी लद्दाख में हुई घटनाओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विकास को अनिवार्य रूप से प्रभावित किया। उन्होंने वांग से कहा कि मौजूदा स्थिति का तत्काल समाधान दोनों देशों के हित में है। जयशंकर और वांग की मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के मौके पर मॉस्को में हुई।
इससे पूर्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके चीनी समकक्ष जनरल वेई फ़ेंगहे भी 4 सितंबर को मॉस्को में एससीओ की बैठक के मौके पर मिले थे। मई की शुरुआत से भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनावपूर्ण गतिरोध चल रहा था। दोनों पक्षों के बीच 45 साल में पहली बार एलएसी पर गोलीबारी हुई।
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि दोनों पक्ष सीमा मामलों पर सभी मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन करेंगे। भारतीय पक्ष ने जोर देकर कहा कि सभी क्षेत्रों से सैनिकों की तत्काल वापसी को सुनिश्चित करना है। यह भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए आवश्यक है। दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा मसले पर विशेष प्रतिनिधि तंत्र के माध्यम से संवाद जारी रखने पर भी सहमति व्यक्त की।
बताया जा रहा है कि रूस ने भारत-चीन सीमा विवाद के बीच सकारात्मक भूमिका निभाई है। रूस ने लगातार भारत से संपर्क बनाए रखा और हथियारों की सप्लाई समयबद्ध तरीके से जारी रखने पर सहमति जताई। दोनों देश मानते हैं कि शांतिपूर्ण समाधान के लिए वार्ता जरूरी है लेकिन इसके पहले भी कई बार सहमति के बावजूद चीन कई बार मुकर चुका है।
चीन से लगातार धोखे खाने के बाद क्या पांच सूत्रीय फार्मूले पर भरोसा किया जा सकता है। चीनी मीडिया अभी से नकारात्मक बातें फैलाने लगा है। चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि दोनों देशों के बीच पांच बिंदुओं पर बनी सहमति हो सकता है सिर्फ कागजों पर ही रह जाए। लेख में कथित विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया है कि भारत पर वह भरोसा नहीं कर सकते।
