बरेली: ग्राम अदालत... मुकदमेबाजी के जाल से मुक्ति की आस

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

शासन के आदेश पर बरेली में हुई शुरुआत, निपटने शुरू हुए चकबंदी अदालतों में बरसों से लंबित मामले, हर महीने गांवों में लगेगी अदालत, भागदौड़ और गैरजरूरी खर्च से मिलेगी निजात

अनुपम सिंह, बरेली, अमृत विचार : चकबंदी मामलों में मुकदमा दायर करके बरसों दौड़भाग की आफत मोल लेने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। शासन ने चकबंदी विभाग को किसानों की समस्याओं के निस्तारण के लिए गांवों में हर महीने ग्राम अदालत लगाने का आदेश दिया है। उम्मीद की जा रही है कि इससे किसानों की दुश्वारियां कुछ कम होंगी। बुधवार को जिले में ग्राम अदालतों की शुरुआत हो गई।

ये भी पढ़ें -  बरेली: रुविवि शूटिंग रेंज के खिलाड़ियों का नेश हुए नेशनल के लिए क्वालीफाई

इनमें कई पुरानी समस्याएं भी निपटीं। जिले में हजारों किसान जमीन संबंधी विवादों में उलझे हुए हैं। ये विवाद चकबंदी अदालत में पहुंचने के साथ किसानों की जिंदगी में लगातार भागदौड़ और अदालती खर्च का दुर्गम रास्ता खुल जाता है। तारीखें मिलती रहती हैं और किसान दौड़ते रहते हैं। इन किसानों को ग्राम अदालतों से राहत मिलने की उम्मीद है।

शासन के आदेश के मुताबिक इन अदालतों में सीओ चकबंदी और लेखपालों के साथ एसओसी यानी जिला बंदोबस्त अधिकारी और जीडीसी यानी उप संचालक चकबंदी भी जाएंगे। लंबित मामलों को दोनों पक्षों से बातचीत और आपसी सुलह समझौते के आधार पर निपटाया जाएगा।

50 में से 40 वाद निपटाए, किसानों के चेहरे खिले: आंवला तहसील के दिगोई गांव में बुधवार को आयोजित ग्राम अदालत में चकबंदी विभाग के अधिकारियों ने 50 मामलों की सुनवाई की जिसमें 40 का आपसी सुलह-समझाैते के आधार पर निस्तारण करा दिया।

बरसों पुराने मामलों का निस्तारण होने के बाद किसानों के चेहरे खिल गए। ये किसान लंबे समय से वादों के निस्तारण के लिए भागदौड़ कर रहे थे। इनमें ज्यादातर आपत्ति, अपील और निगरानी के मामले थे।

इस महीने यहां लगेंगी अदालतें: इस महीने चकबंदी विभाग चार ग्राम अदालतें लगाएगा। बुधवार को एक लग चुकी है। अब आठ सितंबर को फरीदपुर तहसील के गांव मल्हपुर, 12 सितंबर को बहेड़ी के बंजरिया और 13 सितंबर को आंवला के गांव बेहटा लालच में ग्राम अदालत लगाई जाएगी।

चकबंदी न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण के लिए हर महीने ग्राम अदालतें लगाई जाएंगी। ये अदालतें वहीं लगेंगी, जिन गांव के मामले कोर्ट में लंबित हैं। अदालतें लगाने से पहले गांव के लोगों को सूचित भी किया जाएगा। - पवन कुमार सिंह, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी

ये भी पढ़ें - बरेली: स्वामी प्रसाद पर दर्ज नहीं हुई रिपोर्ट, आमरण अनशन शुरू

 

संबंधित समाचार

टॉप न्यूज