Kanpur: अमृत विचार से बातचीत में सुभाषिनी अली सहगल बोली- चाहे जितने कर लो गठजोड़ कहां से लाओगे इंडिया का तोड़
कानपुर में अमृत विचार ने माकपा पोलिटब्यूरो सदस्य सुभाषिनी अली सहगल स बातचीत की।
कानपुर में अमृत विचार ने माकपा पोलिटब्यूरो सदस्य सुभाषिनी अली सहगल स बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि चाहे जितने कर लो गठजोड़ कहां से इंडिया का तोड़ लाओगे।
कानपुर, [महेश शर्मा]। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पोलिट ब्यूरो की सदस्य कानपुर से पूर्व सांसद सुभाषिनी अली सहगल यूपी में घोसी विधानसभा सीट पर उपचुनाव में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के समाजवादी पार्टी प्रत्याशी सुधाकर सिंह की जीत ने केवल यूपी बल्कि देश की जनता का मूड बता दिया है। देश में सात उपचुनाव में से चार में ‘इंडिया’ की जीत से साफ है कि जनता ने भाजपा की नकारात्मक विचारधारा को खारिज करना शुरू कर दिया है। यानी भाजपा की उल्टी गिनती शुरू। वह यह भी कहती हैं कि घोसी की जीत में बहुजन समाज पार्टी की भी प्रमुख भूमिका है।

पोलिट ब्यूरो सदस्य पूर्व सांसद सुभाषिनी अली सहगल
बसपा प्रमुख मायावती की अपील पर उनके वोटरों ने नोटा भी दबाया और जो वोट देने गए भी होंगे तो उन्होंने विपक्षी प्रत्याशी को वोट दिया। इस जीत में बसपा का योगदान नहीं नकारा जा सकता। पोलिट ब्यूरो सदस्य पूर्व सांसद सुभाषिनी अली सहगल से अमृत विचार से हुई बातचीत के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं।
सवाल-घोसी में भाजपा के मुकाबले ‘इंडिया के सपा प्रत्याशी की जीत को आप किस तरह देखती हैं?
जवाब-यह संकेत है कि 2024 का लोकसभा चुनाव किस ओर जाएगा। यह लोकतंत्र की सीधी जीत है। भारी अंतर से साफ है कि सपा और ‘इंडिया गठबंधन प्रत्याशी को जनता ने भरपूर वोट दिया। सांप्रदायिक नकारात्मक राजनीति को देश में खारिज किए जाने की शुरू हो चुकी है।
सवाल-बसपा ने तटस्थ रहने का निर्णय लिया और अपने वोटरों से साफ कहा कि यदि वोट डाले भी नोटा दबाएं। क्या इसका लाभ विपक्ष प्रत्याशी को नहीं मिला?
जवाब-बिल्कुल मिला। पर यह जीत का एक फैक्टर हो सकता है। मायावती की अपील के बाद जिन लोगों ने वोट डाला भी होगा तो भाजपा को नहीं डाला। भाजपा ने सोचा नहीं होगा कि इतनी बुरी तरह हार होगी। यह परिवर्तन के संकेत हैं।
सवाल- सात उपचुनाव में जीत ‘इंडिया’ की चार पर जीत का क्या संदेश है? सीट शेयरिंग को लेकर विवाद की अटकलें लगायी जा रही हैं। क्या लगता है?
जवाब-देश भाजपा को हराने की तरफ चल पड़ा है। यह परिवर्तन के संकेत हैं। 2024 में ‘इंडिया’ का विजय रथ भाजपा रोक नहीं पाएगी। रही सीट शेयरिंग की बात तो इस पर कोई विवाद ही नहीं है। जहां पर थोड़ा बहुत खींचतान होगी भी तो वहां पर भाजपा का कुछ नहीं है। समाज को बांटने वाली राजनीति को जनता ने नकारना शुरू कर दिया है। घोसी में सत्ता दुरुपयोग की सभी कोशिशें बेकार गयीं। यूपी ही 2024 में सत्ता परिवर्तन को लीड करेगा। शुरुआत हो चुकी है।
सवाल- चुनाव के मद्देनजर भारत लिखा जा रहा है?
जवाब-इंडिया को नहीं हटाया जा सकता है। दुनिया में हमारी पहचान इंडिया के नाम से है। यह कहना गलत है कि इंडिया नाम अंग्रेजों ने दिया है। और फिर संविधान के अनुच्छेद एक में भी इंडिया दैट इज भारत लिखा है। दरअसल विपक्ष के गठबंधन का नाम इंडिया रखे जाने से मोदी सरकार डर गयी है। इसे नाहक मुद्दा बनाया जा रहा है। मोदी सरकार चौतरफा घिर गयी है। नूंह हिंसा किसानों के कारण हैंडल की जा सकी। हालिया चुनावी नतीजों से सरकार और भी डर गयी।
सवाल-विपक्ष के गठबंधन इंडिया में सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए में कहा जा रहा है कि इंडिया गठबंधन टूट भी सकता है?
जवाब-सत्ता खोने की संभावना के कारण भयभीत भाजपा ही यह फैला रही है। उसे लगता है कि 2024 एक बार फिर उन्हीं का है। पर अबकी ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला है। उत्तराखंड और त्रिपुरा में तीन सीटें भाजपा जीती है बाकी चार पर विपक्ष है। अब रही हिंदी बेल्ट के राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की बात तो तीन राज्यों में तो कांग्रेस आती दिख रही है। बीआरएस को भी एक बार सोचना पड़ेगा कि वह इंडिया के गठबंधन में ही सत्ता बचा सकती है। बाकी देखते हैं।
सवाल-माकपा की क्या स्थिति इंडिया के गठबंधन में होगी? मेरा आशय सीट शेयरिंग को लेकर है।
जवाब-देखिए हम जहां मजबूत हैं वहां का दावा तो करेंगे ही बाकी समर्थन देंगे। गैर भाजपावाद का दौर चल पड़ा है। लड़ाई एक पर एक होगी। फिर सीट शेयरिंग की बात पर कुछ कहना अभी जल्दबाजी होगी।
सवाल-एनडीए का भी कुनबा बढ़ रहा है। आपको भविष्य क्या लगता है?
जवाब-उनके यहां जो कुछ भी है भाजपा है। सुना 35-36 दलों को एकत्र कर चुके हैं। दरअसल मोदी को अपनी हार दिख रही है। चाहे जितने कर लो गठजोड़, कहां लाओगे इंडिया का तोड़।
