शाहजहांपुर: दिनभर पूछतांछ, फिरभी मोटिव का पता नहीं लगा पाई पुलिस
शाहजहांपुर, अमृत विचार। कोतवाली मीरानपुर कटरा में हुईं लूट और हत्याकांड की दो वारदातों में पुलिस की नाकामी खुलकर सामने आ गई है।
वजह है कि सपा नगर अध्यक्ष सरताज अहमद की चाकुओं से गोदकर हत्या और लूटपाट मामले में जिन बदमाशों से पुलिस वारदात का राज तक न उगलवा पाई थी, उन्हीं में से एक को जब प्रोफेसर की हत्या करने के दौरान दबोच लिया गया तो उसने पुलिस की पूछतांछ में न सिर्फ सरताज हत्याकांड का गुनाह कबूल कर दिया, बल्कि साथी सहरोज के शामिल होने का भी राज उगल दिया।
हालांकि पुलिस यह नहीं उगलवा पाई कि इस बार डकैती करने आया था या फिर संपत्ति के विवाद में हत्याकांड को अंजाम देने आया था।
मीरानपुर कटरा में डकैतों ने आठ महीने के भीतर दो सनसनीखेज हत्याकांडों को अंजाम दिया। 23 जनवरी को सपा नगर अध्यक्ष सरताज हत्याकांड में शक की बिना पर पुलिस ने जिस शाहवाज और शहरोज को पकड़ा था, उसी शाहवाज को इस बार 19 सितंबर की तड़के प्रोफेसर आलोक गुप्ता की नृशंस हत्या करने के बाद मौके से दबोच लिया गया।
हालांकि अन्य डकैत भाग निकले। पुलिस का दावा है कि पकड़े गए शहवाज ने इस बार सरताज हत्याकांड का न सिर्फ गुनाह कबूल कर लिया, बल्कि शहरोज के भी शामिल होने का राज खोल दिया। हालांकि दिनभर पूछतांछ के बाद भी पुलिस शहवाज से यह नहीं कबूल करा पाई कि घटना के पीछे असल वजह क्या है।
शायद यही वजह है कि एसपी अशोक कुमार मीणा कहते हैं कि पुलिस दो बिंदुओं पर जांच कर रही है। पहला- लूट का इरादा तो दूसरा संपत्ति का विवाद। एसपी से जब यह पूछा गया कि घटनाक्रम को अंजाम देने की वजह की बाबत बदमाशों के साथ धावा बोलने वाला शहवाज ने क्या उगला? इस पर वह टाल गए।
बोले- पुलिस की जांच पूरी होने के बाद सब पता चल जाएगा। बहरहाल, जिस बदमाश से पुलिस यह उगलवाने में कामयाब हो जाती है कि सरताज हत्याकांड को उसने शहरोज आदि के साथ मिलकर अंजाम दिया था, उसी बदमाश से वर्तमान में हुई वारदात का उद्देश्य तक नहीं जान पाती।
पीड़ित परिजनों का आरोप- नेता के इशारे पर पुलिस छोड़ती रही थी
असिस्टेंट प्रोफेसर आलोक गुप्ता की पत्नी खुशबू उर्फ सोनम गुप्ता सहित परिजनों का कहना है कि नेता सगीर खां डभौरा वाले का संरक्षण बदमाश शाहबाज को हासिल था। यही वजह है कि सरताज हत्याकांड में उस पर शक होने के बाद भी पुलिस ने उसे जब भी पकड़ा, कुछ देर बाद ही छोड़ दिया था।
बता दें कि नेता सगीर खां सत्तापक्ष से जुड़े है और जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ चुके हैं। परिजनों और मोहल्लों वालों का आरोप यह भी है कि पुलिस के एक जिलास्तरीय अधिकारी ने भी उसे क्लीन चिट दे दी थी। यह जानकारी लोगों ने घटनास्थल पर पहुंचे आईजी डॉ. राकेश कुमार को भी दी थी।
सरताज हत्याकांड में व्यक्तिगत रंजिश बताती रही थी पुलिस
सरताज हत्याकांड को तत्कालीन इंस्पेक्टर धर्मेंद्र गुप्ता व्यक्तिगत रंजिश बताते रहे थे। उसी आधार पर वह न सिर्फ विवेचना करते रहे थे, बल्कि 56 साल की सरताज की पत्नी के चरित्र पर लांछन की कोशिश में भी लगे रहे थे।
वह अपने कार्यकाल में डकैती का मुकदमा नहीं लिखना चाहते थे। यही वजह रही कि पत्नी के बेसुध होने दौरान दूर के रिश्तेदार से तहरीर ली थी। अब यह बात सामने आ गई है कि उन्होंने घर घुसे बदमाशों में से नाई शाहरोज का पहचान लिया था, जिसकी दुकान उनके प्रतिष्ठान के सामने थे।
सरताज हत्याकांड में शक...और पूछे यह सवाल
पुलिस भी खूब है, सपा नेता सरताज हत्याकांड में जब पुलिस ने शहरोज और शाहवाज को पकड़ा। पुलिस सूत्र तो यह भी कहते हैं कि जांच के दौरान दोनों को कई बार पकड़कर छोड़ा गया था। नाई शहरोज की दुकान, सरताज के प्रतिष्ठान के सामने थी, इसलिए पूलिस उससे यही पूछती रही कि तू कितने बजे तक दुकान खोले हुए था? सरताज के यहां कौन-कौन आता था।
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