बरेली: कर्ज के बोझ से परेशान व्यापारी बेच रहे दुकान, बोले- कोरोना की मार से उबरे पर झूठे वादे ने कहीं का नहीं छोड़ा

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। कुतुबखाना में फ्लाईओवर बनाने के फैसले का कई महीने तक विरोध करते रहे व्यापारियों की आशंकाएं अब सच साबित होने लगी हैं। समय से पुल का निर्माण पूरा न होने से कर्ज के बोझ से दबे व्यापारियों की बर्बादी का रास्ता खुल गया है।

कारोबार ठप होने के बाद बैंक की किस्तों की अदायगी के संकट में घिरे अस्पताल रोड के 12 कपड़ा व्यापारियों और तीन फुटवियर व्यापारियों ने अपनी दुकानें बेच दी हैं। कई और व्यापारियों ने अपनी दुकानों का सौदा करने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। कई ऐसे भी व्यापारी हैं जिन्होंने यहां अपनी दुकानें बंद कर दूसरे इलाकों में किराए की दुकान ले ली है।

कुतुबखाना इलाके के व्यापारियों का कहना है कि कोरोना के दौरान लंबे समय तक रहे लॉकडाउन ने तमाम व्यापारियों की आर्थिक स्थिति को पहले ही खोखला कर दिया था। जिन व्यापारियों ने बैंक से कर्ज ले रखा था या मार्केट से पैसा उठा रखा था, उन्हें उसकी किस्तें देने के लिए सबकुछ दांव पर लगाना पड़ा।

कोरोना की मार से तो उन्होंने जैसे-तैसे अपना कारोबार बचा लिया लेकिन कुतुबखाना पुल का निर्माण उन पर कोराना से भी ज्यादा भारी पड़ गया। उनकी सामर्थ्य पहले ही खत्म हो चुकी थी, पुल निर्माण के दौरान कारोबार से आए बंद हुई तो किस्तें चुकाना मुश्किल हो गया और उनके पास अपनी दुकानें बेचने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।

व्यापारियों ने बदनामी का हवाला देते हुए दुकानें बेचने वालों के नाम न छापने का आग्रह करते हुए कहा कि अगर वादों के मुताबिक छह महीने के अंदर पुल का निर्माण पूरा करा दिया जाता तो यह स्थिति पैदा न होती। पुल का निर्माण शुरू होने से पहले वे लगातार अपनी किस्तें अदा कर रहे थे।

निर्माण शुरू होने के बाद भी वे जैसे-तैसे पैसे का इंतजाम कर कई महीने तक किस्तें भरते रहे लेकिन जब यह साफ हो गया कि पुल का निर्माण जल्दी पूरा होने वाला नहीं है तो उनकी हिम्मत टूट गई। इनमें से किसी ने अपने कारोबार के लिए कर्ज लिया था तो किसी ने मकान बनवाने के लिए।

कुछ व्यापारी नया कारोबार शुरू करने की हालत में तक नहीं

कुछ व्यापारी ऐसे हैं, जिन्होंने तंगी की वजह से अपना कारोबार हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। कर्ज के भारी बोझ की वजह से वे कहीं और नया कारोबार शुरू करने की स्थिति में भी नहीं है। कोहाड़ापीर रोड के दुकानदारों की भी काफी खराब हालत है।

इस रोड पर अधिकांश कारोबारी हार्डवेयर और सेनेट्री के हैं। सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण सामान दुकान और गोदामों में डंप पड़ा है। इस रोड के कई हार्डवेयर व्यापारियों ने प्रेमनगर और आसपास के इलाके में किराए पर दुकानें लेकर कारोबार शिफ्ट कर लिया है। कुछ दुकानें बंद करके घर बैठे हैं।

ऐसे ही रहा तो कई और दुकानें बिक जाएंगी
जिला अस्पताल रोड के कई बड़े व्यापारियों ने अपना कारोबार समेट लिया है। दर्जन भर से ज्यादा व्यापारी ऐसे हैं जिन्होंने कुतुबखाना पुल निर्माण के कारण कारोबार पूरी तरह खत्म कर दिया है। कई दुकानों का सौदा कर चुके हैं। इनमें कई ऐसे व्यापारी हैं जो दशकों से इसी जगह कारोबार कर रहे थे, लेकिन इस पुल ने उन्हें बर्बाद कर दिया। - संजय आनंद, मेवा व्यापारी

दिवाली तक काम की यही रफ्तार रही तो कारोबार समेटने वाले दुकानदारों की संख्या में 30 से भी पार हो जाएगी। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने व्यापारियों को भरोसे में लेकर उन्हें पूरी तरह बर्बाद करने में कसर नहीं छोड़ी है। अब पुलिस भी पुल के नीचे अवैध फड़ और ठेले लगवाकर हम लोगों की दुश्वारियां लगातार बढ़ा रही है। - लवी अरोरा, कपड़ा व्यापारी

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