खड़गे-राहुल समेत कांग्रेस नेताओं ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को दी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तथा पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सोमवार को उन्हें नमन किया।

खड़गे ने इससे पहले राष्ट्रपिता की समाधि राजघाट और शास्त्री के समाधि स्थल विजय घाट जाकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा, “महात्मा गांधी जी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं हैं, एक विचार, एक विचारधारा और हमारे महान राष्ट्र के नैतिक प्रतीक हैं।

सत्य, अहिंसा, स्वतंत्रता, समानता और सह-अस्तित्व के उनके आदर्श शाश्वत मूल्य हैं। हम बापू की जयंती पर उनके आदर्शों के प्रति श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं।




” गांधी ने कहा, “सत्य, अहिंसा और सौहार्द का रास्ता, भारत को जोड़ने का रास्ता महात्मा गांधी ने ही दिखाया था।

बापू को उनकी जयंती पर शत शत नमन।” खड़गे ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए तरक्की के लिए उनके एकता के संदेश को उदधृरित करते हुए कहा, “देश की तरक्की के लिए हमें आपस में लड़ने के बजाए गरीबी, बीमारी और अज्ञानता से लड़ना होगा- शास्त्री।

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भूमि सुधार से लेकर दुग्ध एवं हरित क्रांति की नींव रखने तक, रेलवे में थर्ड क्लास को खत्म करने से लेकर बसों में महिलाओं के लिए सीट का प्रावधान देने तक, 1965 की जंग से लेकर अपने गाँधीवादी विचारों से देश सेवा करने तक — हमारे आदर्श, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के अभूतपूर्व योगदान को हम याद करते हैं।

उच्च विचारों के धनी शास्त्री जी का सरलता एवं सादगीपूर्ण जीवन, हमारे लिए हमेशा प्रेरणादायक रहेगा। ‘जय जवान-जय किसान।” गांधी ने कहा, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को उनकी जयंती पर नमन।

'जय जवान, जय किसान' के नारे से उन्होंने देश के दो बड़े तपस्वी वर्गों को सशक्त करने का काम किया था। शास्त्री जी का दिखाया रास्ता हमें भारत के हर मेहनती नागरिक को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रेरित करता है।

वहीं  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को आज जयंती पर मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने याद करते हुए उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती का महत्व यूं तो सच्चाई और ईमान के प्रतीक के रूप में सदैव ही रहा है, लेकिन इस साल इसका महत्व बीते सालों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। 

उन्होंने कहा कि जबसे देश आजाद हुआ है, तब से आज तक कभी भी देश के मूल्यों, संविधान और भाईचारे को चुनौती देने वाली ताकतें इतनी सक्रिय नहीं हुईं, जितनी अब हुयी हैं। कमलनाथ ने कहा कि ''गांधी जी और शास्त्री जी'' की जो मुस्कान उनके चित्रों में हमने देखी है, उस मुस्कान को आगे भी बचाए बनाए रखने के लिए हर कांग्रेसी अपने देश से वादा करता है और ये उनका व्यक्तिगत वचन भी है।

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ये दोनों नेता प्रत्येक देशप्रेमी के हृदय में सदैव जीवित रहेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया और अरुण यादव समेत अनेक कांग्रेस नेताओं ने भी देश के दोनों महान नेताओं के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं। 

अपने विरोधियों के प्रति उनमें कोई प्रतिशोध की भावना नहीं थी, उन्होंने कट्टरता, पूर्वाग्रह और नफरत को त्यागने पर जोर दिया और लोगों की भावनाओं को भड़काने के लिए कभी धर्म का दुरुपयोग नहीं किया।

प्रतिशोध और दिखावा उनके चरित्र से बहुत दूर था।" उन्होंने कहा, "आइए, हम सभी इस गांधी जयंती पर झूठ पर सत्य की जीत की दिशा में काम करने का संकल्प लें और यह सुनिश्चित करें कि करुणा की राजनीति नफरत, प्रतिशोध और पूर्वाग्रह की राजनीति पर हावी हो।

" कांग्रेस ने 'एक्स ' पर अपने आधिकारिक हैंडल के माध्यम से पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें याद किया। मुख्य विपक्षी दल ने कहा, "हम भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित लाल बहादुर शास्त्री को अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन्होंने हमें ‘जय जवान, जय किसान’ का प्रतिष्ठित नारा दिया। 

हम राष्ट्र के प्रति उनके अत्यंत समर्पण, उनकी विरासत का सम्मान करते हैं।" महात्मा गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में दो अक्टूबर 1869 को हुआ था। उनके जन्मदिन को गांधी जयंती के साथ ही अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत से भारत को आजाद कराने की लड़ाई का नेतृत्व किया था।

अहिंसक विरोध का उनका सिखाया सबक आज भी पूरी दुनिया में सम्मान के साथ याद किया जाता है। शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। उनका जन्म दो अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनकी सादगी और विनम्रता के लोग कायल थे। उन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया था। 

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