डेंगू की चुनौती

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Edited By Amrit Vichar
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डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। मौसम बदल रहा है। इसके बावजूद डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर की सक्रियता कम नहीं हो रही है। प्रतिदिन डेंगू मरीजों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। शहर हो या गांव सब जगह लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। इस साल डेंगू का फैलाव अचानक हुआ है। 

देश में डेंगू के बढ़ते मामलों से उत्पन्न चुनौती से निपटने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा.मनसुख मांडविया ने अधिकारियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने और डेंगू की रोकथाम, नियंत्रण और प्रबंधन उपायों को मजबूत करने का निर्देश दिया है। 

विशेषज्ञों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन से संक्रामक रोगों का वैश्विक खतरा बढ़ता जा रहा है। जलवायु और रोगों के बीच का घनिष्ठ संबंध साल-दर-साल सिद्ध हो रहा है। मच्छर-जनित रोगों के फैलने की आवधिकता अब अपेक्षित पैटर्न के अनुरूप नहीं रह गई है। डेंगू अब वर्ष भर में दो से तीन चरम अवधि के रूप में प्रकट होता है। तापमान, वर्षा और आर्द्रता की परिवर्तनशीलता रोग संचरण चक्रों को बाधित कर रही है। 

बढ़ता तापमान मच्छरों जैसे रोगवाहकों के वितरण और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। ये रोगवाहक मलेरिया, डेंगू बुखार और लाइम डिजीज जैसी बीमारियों के संचरण/संक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, दक्षिणी चीन, ताइवान, मैक्सिको और मध्य अमेरिका जैसे कई देशों में ये हर साल लोगों को अपनी चपेट में लेता है। करीब पांच लाख लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं और मृत्यु दर 2.5 प्रतिशत है। 

डेंगू एक वायरल रोग है जो एडीज एजिप्टी मच्छर से फैलता है। यह मच्छर रात में हमला करने वाले मलेरिया के मच्छरों के उलट दिन के समय मनुष्यों को काटता है। इसे ‘हड्डी तोड़ बुखार’ के रूप में भी जाना जाता है, जो बुखार से पीड़ित लोगों की मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द के कारण होता है। प्रदेश सरकार ने लोगों से अपील की है कि इस बीमारी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। 

प्रदेश के अस्पतालों में प्लेटलेट्स, खून और बेड की कोई कमी नहीं है। जरूरत पड़ने पर डेंगू के हर मरीज को भर्ती करने का इंतजाम है। मौसम बदलने की वजह से लोगों को वायरल बुखार भी आ रहा है। अगर लक्षण दिखाई देते हैं तो डेंगू की जांच जरूर कराएं।  महामारी का रूप धारण करने से पहले ही आवश्यक कदम उठाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। डेंगू-विरोधी अभियान जैसे जागरुकता कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाने की ज़रूरत है। क्योंकि सावधानी और सतर्कता ही इससे बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। 

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