गंभीर चूक

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Edited By Amrit Vichar
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भारत-चीन सीमा पर लगातार तनाव और खराब हो रहे रिश्तों के बीच चीन द्वारा भारतीय नेताओं, सेना की जासूसी का मामला बेहद चिंताजनक है। चीन के इस जासूसी की जद में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ कई वरिष्ठ लोग भी शामिल हैं। देश के भीतर की हर स्थिति की जानकारी …

भारत-चीन सीमा पर लगातार तनाव और खराब हो रहे रिश्तों के बीच चीन द्वारा भारतीय नेताओं, सेना की जासूसी का मामला बेहद चिंताजनक है। चीन के इस जासूसी की जद में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ कई वरिष्ठ लोग भी शामिल हैं। देश के भीतर की हर स्थिति की जानकारी अगर चीन के पास है तो इस बारे में बहुत पहले पता लग जाना चाहिए था। ऐसा नहीं हुआ है तो देश की खुफिया एजेंसियों की यह बड़ी चूक ही मानी जाएगी।

चीन द्वारा की जा रही इस जासूसी का पता भी मीडिया संस्थान के माध्यम से लगा है। लिहाजा यह कहा जा सकता है कि मीडिया संस्थान अगर इस बात का खुलासा नहीं करता तो खुफिया एजेंसियों को शायद ही इस बात की जानकारी मिल पाती। देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुख की हर छोटी बड़ी सूचना अगर चीन के पास मौजूद रहती है तो यह देश के लिए गंभीर खतरे की बात है।

चीन हमेशा से ही अपनी विस्तारवादी नीति के चलते सीमा पर तनाव की स्थिति बनाए रखता है। लगता है कि सीमा पर लगातार तनाव की स्थिति बनाकर देश की सुरक्षा एजेंसियों को उलझा रखते हुए उसने खुफिया एजेंसियों को इस बात की भनक नहीं लगने दी कि देश की जासूसी की जा रही है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस अगर सरकार से इस बात का जवाब मांग रही है तो यह सही है। इस जासूसी की जद में खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी हैं।

उनके अलावा तीनों सेनाओं को 15 पूर्व प्रमुखों की भी जासूसी की जा रही है। केंद्र सरकार को अब इस मामले में ठोस कदम उठाते हुए इस बात का पता लगाना होगा कि चीन द्वारा की जा रही जासूसी का आखिर पता क्यों नहीं पाया। इतने बड़े और संवेदनशील मामले में आखिर चूक हुई कहां।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले का जल्द से जल्द पता लगाया जाना चााहिए। चीन के मंसूबे भारत को लेकर कभी भी सकारात्मक नहीं रहे और पता नहीं वह इस जासूसी के माध्यम से देश को किस तरह से नुकसान पहुंचाना चाहता था। अगर चीन ने भारत से सूचनाएं जुटाईं हैं तो जाहिर है वह इन सूचनाओं का किसी न किसी रूप में इस्तेमाल कर रहा होगा। जासूसी से जुटाई गई सूचनाओं का वह देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं कर पाए, इसे रोकना भी देश के लिए चुनौती है।